मुंबई वार्ता संवाददाता

सोमवार की शाम जुहू चौपाटी पर अंधेरी तेलुगू समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष और बच्चों ने मिलकर आस्था और उल्लास के साथ पारंपरिक बथुकम्मा उत्सव मनाया। रंग-बिरंगे फूलों से सजाए गए “बथुकम्मा” की पूजा-अर्चना कर देवी दुर्गा को धन्यवाद दिया गया और आने वाले वर्ष के लिए सुख-समृद्धि की कामना की गई।


इतिहास में बथुकम्मा का अर्थ “जीवन का पर्व” बताया गया है। यह त्योहार तेलुगू समाज की महिलाओं द्वारा खासतौर पर धान की फसल की कटाई और घर-गृहस्थी में समृद्धि के लिए देवी पार्वती का आभार व्यक्त करने हेतु मनाया जाता है। यह पर्व न केवल कृषि और आय के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, बल्कि सामूहिकता, संस्कृति और भक्ति का जीवंत उत्सव भी है।


इस अवसर पर अंधेरी के विधायक अमित साटम भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने तेलुगू समाज को संबोधित करते हुए कहा कि “बथुकम्मा” जीवन और आस्था का संगम है, यह पर्व हमें कृतज्ञता और सामाजिक एकता का संदेश देता है।” विधायक ने तेलुगू समाज के सदस्यों को शुभकामनाएँ भी दीं।
कार्यक्रम के आयोजन में अंधेरी तेलुगू समाज के कई प्रमुख सदस्य सक्रिय रूप से शामिल रहे, जिनमें श्रीनिवास पेद्दापल्ली, देवेंद्र गुडा, श्रीनिवास मोगलानी, परशुराम सुदागनी, नारायण गुडा, कीसरी अंजय्या, सिनेती नरसिम्हा, कीसरी नरसिम्हा, श्रीनिवास सुदागनी, बाबू कनवेनी, नवीन पालसम, साई कनवेनी, मनीष पनुगंती और उपेंद्र भासाबोइना प्रमुख रूप से शामिल थे।रंगीन वस्त्रों में सजधजकर महिलाएँ और बच्चियाँ पारंपरिक गीतों और नृत्य के साथ उत्सव में शामिल हुईं।
चौपाटी पर हर तरफ़ भक्ति, संगीत और उत्साह का अद्भुत संगम दिखाई दिया।अंधेरी तेलुगू समाज द्वारा आयोजित यह पर्व मुंबई के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने में तेलुगू परंपराओं की झलक पेश करता है और समाज की एकता व सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर सामने आया।“बथुकम्मा” यह तेलंगाना का प्रसिद्ध पुष्प महोत्सव है, जिसे नवरात्रि के समय महिलाएँ विशेष रूप से मनाती हैं।


