मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार सूखा प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। राज्य के राजस्व मंत्री तथा सूखा राहत मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को फसल नुकसान के पंचनामे की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।


बावनकुले ने बताया कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 45 प्रतिशत फसल नुकसान के पंचनामे पूरे किए जा चुके हैं। सरकार इन पंचनामों की जांच कर रही है, ताकि किसानों की फसल को हुए नुकसान का सही आकलन हो सके और पात्र किसानों तक राहत राशि समय पर पहुंचाई जा सके। शेष पंचनामे जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
समीक्षा बैठक में राज्य में उपलब्ध जल भंडारण, फसल नुकसान, चारा उपलब्धता और किसानों को राहत देने के उपायों पर चर्चा हुई। सरकार ने सूखे की स्थिति को देखते हुए पानी के इस्तेमाल को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार राज्य के 265 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है और केंद्र से अंतरिम राहत के रूप में फसल नुकसान के लिए करीब 13,000 करोड़ रुपये तथा चारे के लिए 4,500 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
■ निर्माण कार्यों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक
बावनकुले ने बताया कि सूखे की स्थिति को देखते हुए सरकार निर्माण कार्यों में पीने योग्य या उपचारित पेयजल के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए शासन निर्णय जारी करेगी। निर्माण कार्यों के लिए केवल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य उपलब्ध पेयजल भंडार को प्राथमिकता से सुरक्षित रखना है।
■ किसानों पर कर्ज वसूली का दबाव डालने वालों पर कार्रवाई
बैठक में सूखे के दौरान किसानों पर कर्ज चुकाने के लिए बैंकों और निजी साहूकारों द्वारा कथित दबाव बनाए जाने की शिकायतों पर भी चर्चा हुई। बावनकुले ने कहा कि जिन किसानों ने पहले ही फसल ऋण लिया है, उनसे बार-बार दस्तावेज मांगकर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि राष्ट्रीयकृत और निजी बैंक तथा निजी वित्तदाता यदि सूखे की स्थिति में किसानों पर कर्ज वसूली का दबाव डालते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि ऐसे कुछ तहसीलों और गांवों को सूखा राहत के दायरे में शामिल किया जा सकता है, जो प्रारंभिक ‘ट्रिगर-1’ मानकों में नहीं आए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य फसल नुकसान का सही आकलन पूरा कर दिवाली से पहले अधिक से अधिक पात्र किसानों तक राहत पहुंचाना है।


