दुष्काल ग्रस्त किसानों को हेक्टेयर पर कम से कम 50 हजार रुपये की सीधी मदद दें: रोहित पवार।

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■ 27 सितंबर तक राज्य में 20.50% बारिश की कमी, महाराष्ट्र में 77 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा; मदद नहीं मिली तो 12 से 15 अक्टूबर के बीच समृद्धि महामार्ग रोकने की चेतावनी


मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक और नेता रोहित पवार ने राज्य में दुष्काळी स्थिति को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में दुष्काळ घोषित किए जाने के बावजूद अब तक किसानों के लिए कोई ठोस आर्थिक सहायता घोषित नहीं की गई है। उन्होंने मांग की कि किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम 50 हजार रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जाए।


मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में रोहित पवार ने कहा कि शरद पवार ने किसानों और दुष्काळी स्थिति को लेकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर राज्यभर की स्थिति की जानकारी ली है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने दुष्काळ घोषित कर दिया है, लेकिन किसानों को कितनी सहायता मिलेगी, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा अभी तक सामने नहीं आया है। इससे किसानों में अस्वस्थता है।


रोहित पवार ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार किसानों के लिए कोई योजना और आर्थिक सहायता घोषित करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 12 अक्टूबर तक किसानों के लिए सहायता घोषित नहीं की गई तो 12 से 15 अक्टूबर के बीच किसान और खेत मजदूर समृद्धि महामार्ग को रोकने का आंदोलन करेंगे।


उन्होंने दावा किया कि 27 सितंबर तक राज्य में 783.6 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से 20.50 प्रतिशत कम है। नासिक विभाग में बारिश की कमी 34.30 प्रतिशत, कोकण में 9.80 प्रतिशत और नागपुर विभाग में 25 प्रतिशत बताई गई है।


रोहित पवार के अनुसार, किसानों ने खरीफ फसलों की बुआई के लिए करीब 95,500 करोड़ रुपये खर्च किए थे और 1,28,866 करोड़ रुपये के उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन बारिश की कमी के कारण यह अपेक्षित उत्पादन प्रभावित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि मराठवाड़ा में सोयाबीन, कपास, तूर और मक्का समेत फसलों पर 33,750 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पूरे विदर्भ में 22,456 करोड़ रुपये और अकेले यवतमाल जिले में 5,136 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया।

उत्तर महाराष्ट्र में 10 हजार करोड़ और अहिल्यानगर जिले में 3,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान उन्होंने बताया। उनके मुताबिक, महाराष्ट्र में कुल नुकसान करीब 77 हजार करोड़ रुपये है। इसमें फल फसलों और गन्ने का नुकसान शामिल नहीं है। उन्होंने रबी सीजन में भी 35 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया।


रोहित पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने किसानों को सरसकट यानी व्यापक आधार पर मदद देने की बात कही है, इसलिए सरकार को खेतों में हुए नुकसान के आधार पर सभी प्रभावित किसानों को सहायता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में कीटनाशकों के दाम बढ़े हैं और बीजों को लेकर 17 हजार शिकायतें सामने आई हैं।


उन्होंने सरकार द्वारा घोषित दुष्काली राहत उपायों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जमीन के राजस्व में छूट से किसान को केवल 400-500 रुपये का लाभ होगा, जबकि किसानों को कर्जमाफी की जरूरत है। उन्होंने कृषि से जुड़े कर्ज की वसूली पर रोक, कृषि पंपों के बिजली बिल में छूट, विद्यार्थियों की परीक्षा फीस में माफी, रोजगार गारंटी योजना में नियमों में ढील, जरूरतमंद किसानों और खेत मजदूरों को अनाज, पशुओं के चारे की व्यवस्था तथा जलसंधारण के काम शुरू करने जैसे उपायों को अपर्याप्त बताया।


रोहित पवार ने कहा कि एसडीआरएफ के नियमों के तहत जिरायती खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये और अधिकतम 17 हजार रुपये की सहायता से किसानों की भरपाई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जब किसान का खर्च प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच गया है, तो कम से कम प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सीधी मदद दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से पिछले वर्ष की तरह किसानों को निराश नहीं करने की अपील की।


पत्रकार परिषद के दौरान रोहित पवार ने जालना के एक किसान से सीधे वीडियो कॉल पर बातचीत भी की। किसान ने बताया कि उसे फसल बीमा की राशि नहीं मिली है। पूछताछ करने पर फसल बीमा बंद होने की जानकारी दी गई और इस वर्ष नुकसान का जायजा लेने के लिए कोई अधिकारी खेत पर नहीं आया।


इस पर रोहित पवार ने दावा किया कि किसानों, केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर बीमा कंपनियों को 2,394 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया, जबकि किसानों को नुकसान भरपाई के रूप में केवल 1,938 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने कहा कि “भरे गए प्रीमियम के बराबर भी पैसा किसानों को वापस नहीं मिला।” उनके अनुसार, किसानों को प्रति हेक्टेयर केवल 4,306 रुपये मिले, जबकि 17 हजार रुपये की मांग की गई थी।


रोहित पवार ने यह भी आरोप लगाया कि कृषि समृद्धि योजना के पिछले तीन वर्षों के 15 हजार करोड़ रुपये अब तक नहीं दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा 31,628 करोड़ रुपये का अनुमान लगाए जाने के बावजूद उसमें से केवल करीब 25 प्रतिशत राशि ही किसानों तक पहुंची है।

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