मुंबई वार्ता संवाददाता

देशभर में 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल विपणन कंपनियों ने नई दरें लागू कर दी हैं। लंबे समय बाद ईंधन कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी है। इससे पहले 21 मार्च 2025 को आखिरी बार दामों में बदलाव किया गया था।


सरकार ने पिछले कई महीनों से राज्य विधानसभा चुनावों के चलते ईंधन कीमतों को स्थिर रखा था, लेकिन चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी का असर सीधे उपभोक्ताओं पर डाला गया है।
■ महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में नई कीमतें
मुंबई: पेट्रोल ₹106.68 प्रति लीटर, डीजल ₹93.14 प्रति लीटर
पुणे: पेट्रोल ₹106.68 प्रति लीटर, डीजल ₹93.14 प्रति लीटर
नाशिक: पेट्रोल ₹106.68 प्रति लीटर, डीजल ₹93.14 प्रति लीटर
■ अभी क्यों बढ़ाए गए दाम?
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का समय राजनीतिक और आर्थिक दोनों कारणों से जुड़ा माना जा रहा है। चुनावों से पहले कीमतें बढ़ाने से जन असंतोष का खतरा रहता है, इसलिए लंबे समय तक दरें स्थिर रखी गई थीं। अब चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करने के लिए कीमतें बढ़ाई गई हैं।
पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास शिपिंग मार्गों में बाधाओं के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पेट्रोल पर लगभग ₹26 प्रति लीटर और डीजल पर ₹81.90 प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी हो रही थी। सरकारी तेल कंपनियां प्रतिदिन करीब ₹2,400 करोड़ का बोझ उठा रही थीं।
■ रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाया दबाव
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आने से कच्चे तेल का आयात और महंगा हो गया है। इसका असर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों की लागत पर पड़ा, जिसके बाद कीमतों में वृद्धि का फैसला लिया गया।
■ भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करती हैं। भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरत आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर सीधे घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। रुपया कमजोर होने पर तेल आयात महंगा हो जाता है, जिससे खुदरा कीमतें बढ़ती हैं।
● अलग-अलग शहरों में अलग क्यों होते हैं दाम?
पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स अंतिम कीमत का बड़ा हिस्सा होते हैं। हर राज्य में वैट और अन्य कर अलग-अलग होने के कारण ईंधन की कीमतें भी अलग होती हैं। इसके अलावा परिवहन लागत और स्थानीय मांग-आपूर्ति की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित करती है।


