■ चुनाव आयोग की अव्यवस्थित कार्यप्रणाली, फर्जी मतदान, धनबल और सत्ताबल का चुनावों में भारी दुरुपयोग.
मुंबई वार्ता संवाददाता

नगरपालिका और नगर परिषद चुनावों में चुनाव आयोग की लापरवाह और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली एक बार फिर उजागर हुई है। मतदाता प्रक्रिया को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया गया, तारीख पर तारीख का खेल चलता रहा। यह चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष (फ्री एंड फेयर) नहीं रहा। सत्ताधारी दलों द्वारा साम, दाम, दंड, भेद की नीति का खुलेआम इस्तेमाल किया गया। चुनावों में फर्जी मतदाता, दबाव की राजनीति, सत्ता का दुरुपयोग और धन का भारी प्रयोग देखने को मिला। सत्ताधारी दलों की जीत में चुनाव आयोग की भूमिका सबसे अहम रही है, ऐसी प्रतिक्रिया महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दी है।


चुनाव परिणामों पर मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भाजपा महायुति सरकार के कामकाज से जनता बेहद नाराज़ है। भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर फैला हुआ है, जनता के काम नहीं हो रहे हैं। ऐसे हालात में आज आए नतीजे जनता का वास्तविक जनादेश नहीं लगते। लोकतंत्र और संविधान की खुलेआम अवहेलना करते हुए दमन किया गया। चुनाव आयोग सत्ताधारियों के हाथों की कठपुतली बन गया है।


चुनाव आयोग की अव्यवस्थित कार्यशैली और सत्ताधारी दलों का “पैसा फेंको–तमाशा देखो” वाला खेल इन चुनावों में साफ दिखाई दिया। इन सभी परिस्थितियों के कारण कांग्रेस पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। हालांकि कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, फिर भी कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। यह हमारी वैचारिक लड़ाई है, ऐसा सपकाल ने कहा।
नगरपालिका चुनावों में भाजपा को मिली सफलता एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। भाजपा अपने शत-प्रतिशत विस्तार के लिए इन दोनों सहयोगी दलों को बाहर का रास्ता दिखाएगी, ऐसा भी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


