मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के महाराष्ट्र प्रवक्ता एडवोकेट फैजान मिर्जा ने मंत्री नितेश राणे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की आलोचना करने मात्र से किसी व्यक्ति को देशद्रोही कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने नितेश राणे से संविधान पढ़ने और उसके प्रावधानों की जानकारी रखने की अपील की।
फैजान मिर्जा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मानना था कि मजबूत लोकतंत्र के लिए आलोचना और टिप्पणी आवश्यक है। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री पर आलोचनात्मक टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को देशद्रोही कहने का आधार क्या है और कानून में ऐसी कौन-सी परिभाषा दी गई है।


उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को अभिव्यक्ति और विचार रखने की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्राप्त है। मिर्जा ने कहा, “नितेश राणे स्वयं मंत्री हैं। ऐसे में उन्हें कम से कम यह जानकारी तो होनी चाहिए कि संविधान में नागरिकों के अधिकारों को लेकर क्या प्रावधान किए गए हैं।”


मिर्जा ने नितेश राणे के पूर्व बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जब उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और अनिल देशमुख गृहमंत्री थे, तब राणे ने दोनों नेताओं की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस समय राणे को महाराष्ट्रद्रोही कहा जाना चाहिए था या यह माना जाना चाहिए था कि वे किसी अन्य देश की “स्क्रिप्ट” पर बोल रहे थे?
उन्होंने कहा कि सत्ता बदलने से संविधान नहीं बदलता। लोकतंत्र में सरकार और प्रधानमंत्री की नीतियों तथा कार्यों पर सवाल उठाना और आलोचना करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। मिर्जा ने कहा, “टीका यानी आलोचना देशद्रोह नहीं है। आलोचना का जवाब देना ही लोकतंत्र की वास्तविक भावना है।”
एडवोकेट फैजान मिर्जा ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को देशभक्ति या देशद्रोह के प्रमाणपत्र से जोड़ने के बजाय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर बहस होनी चाहिए।


