रवीन्द्र मिश्रा । मुंबई वार्ता

बड़ी बड़ी होटलों, पबों या सभागारों में पार्टी आयोजित कर जो आनंद मिलता है उससे कहीं ज्यादा आनंद किसी अनाथाश्रम में रहने वाले लोगों के साथ अगर मनाया जाए तो इसका आनंद कोई और ही होता है।यह कहना है मधुराठी सांई भंडारा के सदस्य प्रमोद रावल का ।


रावल कहते हैं कि जब मैंने मधुराठी सांई भंडारा के अध्यक्ष मधु राठी से अपनी शादी की 40वीं वर्ष गांठ मनाने के लिए उनसे राय मांगी तो उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए वसई पूर्व का (अपनाघर) उत्तम होगा। हम भंडारा टीम के सदस्य हरीश श्राफ, राजीव नांवदार, महेंद्र बहल, राजकुमार अग्रवाल तथा मधुराठी के साथ वसई भिवंडी रोड भजनलाल डेयरी के पास स्थित अपना घर आश्रम पहुंचे। वहां पता चला कि यहां 210 निराश्रित लोगों की सेवा प्रभू की सेवा मानकर की जाती है।


यह भी जानकारी मिली कि इस सामाजिक संस्था की पूरे देश में नेपाल सहित कुल 60 से भी अधिक शाखाएं जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है का प्रभू रुप मानकर उसकी सेवा की जाती है ।


पूछने पर यह भी पता चला कि राजस्थान भरतपुर के रहने वाले डॉक्टर भारद्वाज ने सड़कों पर अनाथ हुए लोगों के लिए यह सेवा शुरू किया था जो आज अनवरत जारी है । यहां आकर हमने भी यहां के लोगों के साथ भोजन में शरीक होकर अपनी शादी की सालगिरह मना कर उनका आशीर्वाद लिया। सचमुच हमें आज जो खुशी मिली वह कभी नहीं मिली थी।


