मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगर पालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में पहली मंज़िल पर रहने वाले झोपड़ीवासियों को मुफ्त या सशुल्क घर देने की घोषणा राज्य सरकार की ओर से की जाने वाली थी। लेकिन नागपुर में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ऐन वक्त पर यह प्रस्ताव पेश नहीं किया गया। इससे सरकार की सकारात्मक भूमिका के बावजूद पहली मंज़िल पर रहने वाले झोपड़ीवासियों को फिलहाल और इंतज़ार करना पड़ेगा। इसकी पुष्टि आवास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने की है।


पहले मंज़िल पर रहने वाले झोपड़ीवासियों को घर मिलना चाहिए, यह मांग सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के उत्तर मुंबई से पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने उठाई थी। वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर सहमति भी जताई थी, लेकिन बाद में यह मामला न्याय एवं विधि विभाग को भेज दिया गया।कानूनी प्रावधानों के अनुसार पहली मंज़िल पर रहने वाले झोपड़ीवासियों को ‘संरक्षित निवासी’ नहीं माना जा सकता, इसलिए उन्हें झोपड़पट्टी पुनर्विकास (एसआरए) योजना का सीधा लाभ नहीं दिया जा सकता।


हालांकि न्याय एवं विधि विभाग ने यह स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना या इसी तरह की अन्य योजनाओं के तहत उन्हें घर देने में कोई आपत्ति नहीं है।इस बीच राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद महाविकास आघाड़ी की सरकार बनी, जिसने इस मांग को खारिज कर दिया। तब से गोपाल शेट्टी इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रयास कर रहे थे।


