श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में बीते पांच वर्षों के दौरान 65 छात्रों ने आत्महत्या की, जिससे इन परिसरों में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आई है।


RTI से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2021 में जहां 9 आत्महत्याएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 15 हो गई। सभी IITs में सबसे अधिक 11 आत्महत्याएं IIT खड़गपुर में दर्ज की गईं। कुल 65 मामलों में से 54 छात्र पुरुष थे।यह RTI IIT कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह ने दाखिल की थी, जो वर्तमान में IIT छात्रों के लिए एक वैश्विक मेंटरशिप नेटवर्क चलाते हैं।


फरवरी 2023 में IIT बॉम्बे में प्रथम वर्ष के छात्र की आत्महत्या के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया था, जिसके बाद IIT काउंसिल ने छात्रों पर शैक्षणिक दबाव कम करने का निर्णय लिया।
धीरज सिंह ने कहा,“IIT छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या बेहद गंभीर है। पिछले 20 वर्षों में कम से कम 150 छात्रों की IIT परिसरों में आत्महत्या हो चुकी है। आत्महत्याएं इस संकट का केवल दिखाई देने वाला हिस्सा हैं।”
उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हर एक आत्महत्या के पीछे 20 से अधिक आत्महत्या के प्रयास होते हैं, जिससे संकट की वास्तविक गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने सरकार से इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में देखने की मांग की।
सिंह के अनुसार, छात्र आत्महत्याओं के पीछे शैक्षणिक दबाव, रोजगार को लेकर अनिश्चितता, पारिवारिक और व्यक्तिगत समस्याएं, भेदभाव और उत्पीड़न जैसे कारण प्रमुख हैं। IITs में लगभग पांचवां हिस्सा हाशिए के समुदायों से आता है, लेकिन आत्महत्या के मामलों में इनकी हिस्सेदारी लगभग दोगुनी पाई गई है।आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि अधिकांश आत्महत्याएं सेमेस्टर परीक्षाओं के आसपास होती हैं, जबकि शैक्षणिक अवकाश के दौरान ऐसे मामले सबसे कम दर्ज किए जाते हैं। इसके अलावा, 80 प्रतिशत से अधिक आत्महत्याएं परिसर के भीतर हुईं, जो कैंपस के भीतर मौजूद दबाव और परिस्थितियों की ओर इशारा करता है।हालांकि IITs ने रोकथाम के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन इसके बावजूद आत्महत्याओं की संख्या में लगातार वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है।
सिंह ने कहा,“यह वृद्धि बताती है कि केवल तात्कालिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समग्र और दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।”उन्होंने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य संकेतकों को शामिल करने की भी मांग की है।इधर, IIT खड़गपुर ने बढ़ते मामलों को देखते हुए छात्र कल्याण के लिए विशेष कदम उठाए हैं। संस्थान ने छात्र कल्याण पर केंद्रित एक विशेष चीफ ऑफ स्टाफ की नियुक्ति की है।
इस पद पर सितंबर से कार्यरत अभ्रजीत साहा ने बताया कि कैंपस में अब 11 पूर्णकालिक मनोवैज्ञानिक, वेलनेस के लिए अलग डीन, और SETU कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित छात्र स्वयंसेवक मौजूद हैं।पिछले तीन महीनों में IIT खड़गपुर में 500 से अधिक वेलनेस कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं और प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए अतिरिक्त सहायता कार्यक्रम भी शुरू किया गया है।
अभ्रजीत साहा ने कहा,“हमारे आंतरिक विश्लेषण में सामने आया है कि मदद मांगने वाले करीब 80 प्रतिशत छात्र पारिवारिक, दोस्ती या संबंधों से जुड़ी समस्याओं और आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे हैं।”उन्होंने कहा कि संस्थान समुदाय निर्माण और छात्र सहभागिता पर विशेष ध्यान दे रहा है।



ऐसी शिक्षा किस काम की