ज्ञानेंद्र मिश्र/स्तंभकार/मुंबई वार्ता

अब चूंकि मोदी जी ने पाकिस्तान की बलि लेना कमोबेश तय कर ही दिया है, तो यह भारत के सर्वोत्तम हित में होगा कि वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पर कब्जा कर ले। अगर भारत PoK पर कब्जा करता है, तो इससे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजना पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
■ CPEC मार्ग
CPEC PoK से होकर गुजरता है, एक विवादित क्षेत्र जिस पर भारत अपना दावा करता है। भारत की इस परियोजना की वैधता के बारे में चिंताएं इसी तथ्य से उत्पन्न होती हैं, क्योंकि यह इसे अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन मानता है।
■ चीन पर प्रभाव
अगर भारत PoK पर कब्जा करता है, तो चीन को CPEC परियोजना को पूरा करने में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। चीन ने इस परियोजना में भारी निवेश किया है, जिसके अनुमानित मूल्य लगभग 62 अरब डॉलर हैं। PoK पर नियंत्रण खोना चीन के लिए एक बड़ा नुकसान होगा।
■ संभावित परिणाम- पुनः बातचीत :
चीन को भारत के साथ CPEC परियोजना की शर्तों पर पुनः बातचीत करनी पड़ सकती है, जिससे परियोजना के मार्ग या दायरे में बदलाव हो सकता है।-
■ वैकल्पिक मार्ग:
चीन CPEC के लिए वैकल्पिक मार्गों की खोज कर सकता है, जिससे PoK को बायपास किया जा सके या अन्य क्षेत्रों के माध्यम से नए रास्ते खोजे जा सकें।-
■ कूटनीतिक प्रयास:
चीन मुद्दे को हल करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज कर सकता है, जिसमें संभावित रूप से एक पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए पाकिस्तान और भारत के बीच त्रिपक्षीय वार्ता शामिल हो सकती है।
■ विभिन्न हितधारकों की चिंताएं- बेलोचिस्तान प्रांत:
परियोजना ने पाकिस्तान के बेलोचिस्तान प्रांत में अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा दिया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है।-
■ अंतर्राष्ट्रीय चिंताएं
कुछ पश्चिमी देश CPEC को चीन द्वारा सदस्य देशों की संप्रभुता को प्रभावित करने के लिए एक ऋण जाल उपकरण के रूप में देखते हैं।
■ निष्कर्ष
CPEC परियोजना का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, और PoK पर कब्जा करने से चीन और पाकिस्तान के लिए नई जटिलताएं और चुनौतियां पैदा होने की संभावना है- जो निश्चित तौर पर भारत के हित में होगा।


