मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर रिलायंस फाउंडेशन के वंतारा केंद्र में तेंदुओं को रखने की व्यवस्था की गई है। अब तक 25 तेंदुओं को वहां स्थानांतरित किया जा चुका है, जबकि कुल 50 तेंदुओं को शिफ्ट करने का समझौता हुआ है।


नाइक के अनुसार, यह कदम राज्य में तेंदुओं की बढ़ती संख्या और मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि के कारण उठाया गया है। खासकर पुणे जिले में स्थिति गंभीर हो गई है, जहां लगभग 150 तेंदुओं को पकड़ा गया था। इसी कारण राज्य सरकार ने तेंदुओं के पुनर्वास के लिए वंतारा सुविधा का सहारा लिया।


वन मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में राज्य में तेंदुओं की संख्या करीब चार गुना बढ़ गई है। वहीं बाघों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जो सात-आठ साल पहले 101 थी और अब बढ़कर 444 हो गई है। उन्होंने कहा कि यह संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है, लेकिन इसके साथ प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
मानव-तेंदुआ संघर्ष से निपटने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा ने वन्यजीव संरक्षण कानून में संशोधन पारित किया है। इस संशोधन का उद्देश्य त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। पहले मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को तेंदुओं के स्थानांतरण या नियंत्रण जैसे कदम उठाने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती थी।
अब संशोधित प्रावधानों के तहत मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राज्य सरकार की मंजूरी से ही तेंदुओं के वैज्ञानिक प्रबंधन, जैसे स्थानांतरण और जनसंख्या नियंत्रण, के लिए निर्णय ले सकेंगे। इससे संघर्ष की स्थिति में तेजी से कार्रवाई संभव होगी।
नाइक ने स्पष्ट किया कि इस संशोधन को लेकर कुछ गलतफहमियां हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी परिस्थिति में तेंदुओं को मारने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसके अलावा, वन विभाग राज्य के हर जिले में तेंदुआ और बाघ सफारी शुरू करने की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।


