मुंबई वार्ता संवाददाता

राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में बीते दिन आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन स्थानीय पुलिस प्रशासन की सतर्कता, रणनीतिक तैनाती और संवाद के चलते पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। करीब 10 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी वाले इस आयोजन पर प्रदेश भर की निगाहें टिकी थीं, लेकिन लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की चाक-चौबंद व्यवस्था के आगे भड़काऊ तत्वों की हर कोशिश नाकाम रही।


प्रदर्शन में देश की कई नामी कोचिंग संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके की उपस्थिति ने माहौल की संवेदनशीलता बढ़ा दी थी। ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी। चुनौती को स्वीकारते हुए डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर के नेतृत्व में भारी पुलिस बल मैदान में उतरा। एडीसीपी जितेंद्र कुमार दुबे और एसीपी महानगर अंकित कुमार भी पूरी टीम के साथ मौके पर डटे रहे। सुरक्षा का खाका पहले से तय था। इको गार्डन के सभी प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर, बैरिकेडिंग और सीसीटीवी निगरानी लगाई गई। भीड़ के बीच वर्दीधारी जवानों के अलावा बड़ी संख्या में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों से आसमान से निगरानी हुई और वीडियोग्राफी टीम ने हर गतिविधि रिकॉर्ड की। पीएसी की टुकड़ियां, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस को स्टैंडबाय पर रखा गया ताकि किसी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।


प्रदर्शन के दौरान बीच-बीच में कुछ असामाजिक तत्वों ने नारेबाजी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन तैनात पुलिस ने फौरन हस्तक्षेप किया। संवाद और सूझबूझ से स्थिति को संभाला गया। पत्रकारों से भीड़ की तीखी बहस की नौबत आई, पर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने दोनों पक्षों को अलग कर मामला शांत कराया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से कोई भी बात आगे नहीं बढ़ पाई और प्रदर्शन अनुशासित तरीके से आगे बढ़ता रहा। शाम करीब 5 बजे निर्धारित समय पर प्रदर्शन समाप्ति की घोषणा होते ही भीड़ ने शांति से मैदान खाली कर दिया। बिना किसी झड़प, तोड़फोड़ या गिरफ्तारी के आयोजन संपन्न होना लखनऊ पुलिस की कार्यशैली का प्रमाण माना जा रहा है।
डीसीपी सेंट्रल ने कहा कि “हमारा मकसद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए शांति बनाए रखना था। जवानों की मुस्तैदी और जनता के सहयोग से यह संभव हो पाया।”स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने भी पुलिस प्रबंधन की सराहना की। उनका कहना था कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद ट्रैफिक और रोजमर्रा की गतिविधियां बाधित नहीं हुईं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक संवेदनशील माहौल में लखनऊ पुलिस ने संवाद, तकनीक और मैदानी मौजूदगी के त्रिसूत्र से एक मिसाल पेश की है। इको गार्डन का यह प्रदर्शन यह संदेश देता है कि विरोध लोकतंत्र का अधिकार है, और जब प्रशासन मुस्तैदी से साथ खड़ा हो तो शांति भी उतनी ही मजबूत रहती है।


