मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के प्रसिद्ध 7.5 एकड़ क्षेत्र में फैले ग्रेड-2 हेरिटेज बांद्रा तालाब को पुनर्जीवन अभियान के तहत पहली बार पूरी तरह खाली किया गया है। वर्षों पुराने इस ऐतिहासिक जलाशय में अब केवल कीचड़, भारी गाद और मिट्टी के विस्तृत हिस्से दिखाई दे रहे हैं, जहां खुदाई मशीनें और पंप लगातार काम कर रहे हैं।


अधिकारियों के अनुसार यह कार्य तालाब पुनर्स्थापन परियोजना के पहले चरण का हिस्सा है, जिसमें तालाब का पूरा पानी निकालने के बाद व्यवस्थित रूप से गाद हटाने का काम किया जा रहा है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में डीवॉटरिंग और डी-सिल्टिंग का कार्य किया जा रहा है, जबकि दूसरे चरण में तालाब के आसपास सौंदर्यीकरण और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
परियोजना के लिए तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) से जुड़े स्वतंत्र विशेषज्ञ मिलिंद कुलकर्णी ने बताया कि बांद्रा तालाब कई वर्षों से गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा था। उन्होंने कहा कि अध्ययन में तालाब का औसत बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 100 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जबकि एक स्वस्थ झील में यह स्तर 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए। इससे यह अनुमान लगाया गया कि तालाब में सीवेज का रिसाव हो रहा है। हालांकि तालाब में सीधे सीवेज का प्रवाह नहीं है क्योंकि पूरा क्षेत्र बीएमसी की सीवरेज प्रणाली से जुड़ा हुआ है।
एच-वेस्ट वार्ड के सहायक नगर आयुक्त दिनेश पल्लेवाद ने बताया कि डीवॉटरिंग प्रक्रिया के दौरान तालाब में कोई जीवित जलीय प्रजाति नहीं मिली। केवल दो मृत कछुए तालाब की तलहटी से बरामद किए गए, जो पर्यावरणीय स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि तालाब के पास 1 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी बनाया जाएगा। इस संयंत्र से शुद्ध किए गए पानी को दोबारा तालाब में छोड़ा जाएगा, जिससे जल प्रवाह बेहतर होगा और ठहरे हुए पानी तथा ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
बांद्रा पश्चिम के विधायक आशीष शेलार ने हाल ही में कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि बांद्रा तालाब केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान और विरासत का अहम हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों को काम में तेजी लाने और समय पर परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों के अनुसार डी-सिल्टिंग का कार्य पिछले लगभग दो सप्ताह से जारी है। पहले तालाब में लगाए गए एरेटर रखरखाव और बिजली संबंधी समस्याओं के कारण बंद हो गए थे तथा समय के साथ उपकरण भी क्षतिग्रस्त हो चुके थे।


