मानसून से पहले बीएमसी का बड़ा एक्शन: परेल में अवैध ढांचों पर बुलडोजर, एमएमआरडीए पर 1 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना।

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मुंबई वार्ता संवाददाता


मानसून नजदीक आने और हमेशा जलभराव की समस्या से जूझ रहे परेल रेलवे स्टेशन इलाके में बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने सीवरी-वर्ली एलिवेटेड रोड परियोजना से जुड़े ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बीएमसी ने अवैध रूप से बनाए गए साइट ढांचे ध्वस्त कर दिए हैं और परियोजना से जुड़ी एजेंसियों, जिनमें मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) भी शामिल है, पर एक करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।


यह कार्रवाई पिछले सप्ताह हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद शुरू की गई। वार्ड अधिकारियों ने बैठक में चिंता जताई थी कि निर्माण गतिविधियां, फुटपाथों पर अतिक्रमण और मलबा डंप किए जाने से निचले इलाके परेल में जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।


बीएमसी ने पिछले सप्ताह से कार्रवाई करते हुए परेल इलाके में नगरपालिका फुटपाथों पर बनाए गए 5 ठेकेदार चौकियों और 3 गोदामों को ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, ठेकेदारों ने सार्वजनिक फुटपाथों पर निर्माण सामग्री रखने के लिए भी आवश्यक अनुमति नहीं ली थी।


बीएमसी ने एमएमआरडीए के अधीक्षण अभियंता को जारी नोटिस में मई 2024 से मई 2025 के बीच फुटपाथों के कथित अनधिकृत उपयोग के लिए 1.39 करोड़ रुपये ग्राउंड रेंट शुल्क जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि राशि जमा नहीं की गई तो इसे ठेकेदारों के चल रहे बिलों से वसूला जाएगा।


नोटिस में ठेकेदारों को तुरंत निर्माण सामग्री हटाने का आदेश देते हुए कहा गया है कि फुटपाथों के आंशिक उपयोग के लिए भी नई अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बीएमसी ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति फुटपाथों पर सामग्री रखे जाने पर आवश्यक दंड लगाया जाएगा।


इसके अलावा परियोजना कार्यों से जुड़े विभिन्न नुकसान के लिए भी बीएमसी ने दंड लगाया है। इसमें 3.7 लाख रुपये डीवॉटरिंग शुल्क, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क, मैनहोल और जल प्रवेश बिंदुओं को हुए नुकसान के लिए वसूली शामिल है। वहीं जल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने के मामले में 14.85 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।


निर्माण एवं ध्वस्तीकरण अपशिष्ट नीति के तहत बीएमसी ने एमएमआरडीए से 81,144 रुपये भी वसूल किए हैं, जबकि इलाके में मलबा हटाने का अभियान जारी है।


अतिरिक्त नगर आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी ने बताया कि एमएमआरडीए अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान स्टॉर्म वॉटर इनलेट बंद पाए गए और जल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा था। वार्ड कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त नालों और ढके हुए मैनहोल की शिकायत भी दर्ज कराई है।


वहीं अतिरिक्त महानगर आयुक्त विक्रम कुमार ने कहा कि पिछले सात महीनों से कंटेनर वहां रखे हुए थे। मानसून से पहले स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें हटाया गया ताकि फुटपाथ आम जनता के उपयोग के लिए खाली रह सकें। उन्होंने स्वीकार किया कि अनुमति और ग्राउंड रेंट शुल्क से जुड़े कुछ प्रक्रियात्मक मुद्दे हैं, जिन्हें सुलझाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि सीवर नेटवर्क को हुए नुकसान की मरम्मत की जा रही है, जबकि जल पाइपलाइन नुकसान मामले में अभी तक कोई दंड नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है।

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