श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

(बीएमसी) की स्थायी समिति ने वित्त वर्ष 2026–27 के ₹80,952 करोड़ के बजट में से ₹800 करोड़ कॉरपोरेटर्स (नगरसेवकों) के लिए अलग रखकर फंड का बंटवारा तय कर दिया है। हालांकि, सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिले फंड में बड़े अंतर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।


■ किसे कितना फंड मिला?
सत्तारूढ़ गठबंधन के 89 (बीजेपी) और 29 नगरसेवकों को ₹2.25 करोड़ प्रति सदस्य दिए गए हैं (वार्ड विकास कार्यों के लिए)
वहीं, विपक्ष के 25 और 65 नगरसेवकों को ₹25 लाख प्रति सदस्य आवंटित किए गए।


■ समूह नेताओं को मिला फंड
कांग्रेस के और शिवसेना (UBT) की को ₹2 करोड़ प्रत्येक
शिवसेना के को ₹5 से ₹10 करोड़
(AIMIM) के 5 नगरसेवकों को ₹2 करोड़ प्रति सदस्य
■ प्रमुख पदाधिकारियों को आवंटन
स्थायी समिति के अध्यक्ष को ₹25–30 करोड़
हाउस लीडर को ₹20 करोड़
■ क्या कहा सत्ता पक्ष ने?
गणेश खंकर ने इस बंटवारे का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रणाली पहले की अविभाजित शिवसेना के समय से चली आ रही है।
उनके मुताबिक, “नियम वही हैं, सिर्फ उन्हें लागू करने वाले लोग बदल गए हैं।” उन्होंने कहा कि फंड का उपयोग वार्डों में विकास कार्यों और जरूरत के हिसाब से किया जाएगा।
■ विपक्ष की आपत्ति
शिवसेना (UBT) की वरिष्ठ नगरसेवक ने फंड आवंटन में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है और दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। उनके अनुसार, सभी 227 नगरसेवकों को ₹60 लाख मिलने चाहिए थे, जबकि विपक्ष को अतिरिक्त ₹25 लाख दिए जाने की ही जानकारी मिली है।


