मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब भी अधिकांश छात्रों को मुफ्त में मिलने वाली शैक्षणिक सामग्री नहीं मिल सकी है। कॉपियां, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म, छाता, स्कूल किट और सैंडल जैसी आवश्यक वस्तुओं के वितरण में भारी देरी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।


बीएमसी के 918 स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 3.10 लाख छात्रों को हर वर्ष 27 प्रकार की शैक्षणिक सामग्री, जिनमें यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां, स्टेशनरी और अन्य सामान शामिल हैं, मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन इस वर्ष अधिकांश छात्रों को अभी तक पूरा सामान नहीं मिला है।


विक्रोली स्थित एक बीएमसी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र के अभिभावक ने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों के पास कॉपियां खरीदने के पैसे नहीं हैं। ऐसे में वे कक्षा में नोट्स नहीं लिख पा रहे हैं, गृहकार्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं और घर पर अभ्यास भी नहीं कर सकते। उन्होंने सवाल उठाया कि बुनियादी शैक्षणिक सामग्री के बिना बच्चे पढ़ाई कैसे करेंगे।
■ वितरण की स्थिति
बीएमसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार—
90% छात्रों को रेनकोट मिले हैं।
केवल 40% छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म मिली है।
33% छात्रों को सैंडल मिले हैं।
32% छात्रों को स्टेशनरी मिली है।
21% छात्रों को छाते मिले हैं।
सिर्फ 8% छात्रों को कॉपियां मिली हैं।
केवल 4% छात्रों को स्कूल किट वितरित की गई है।
■ कितने छात्र अब भी इंतजार में
2.98 लाख छात्रों को स्कूल किट नहीं मिली।
2.85 लाख छात्रों को कॉपियां नहीं मिलीं।
2.45 लाख छात्र अब भी छाते का इंतजार कर रहे हैं।
2.11 लाख छात्रों को स्टेशनरी नहीं मिली।
2.08 लाख छात्रों को सैंडल नहीं मिले।
1.86 लाख छात्रों को अब तक यूनिफॉर्म नहीं मिली है।
■ देरी की वजह
बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष पहली बार शैक्षणिक सामग्री की खरीद राज्य सरकार के महा-टेंडर पोर्टल के बजाय केंद्र सरकार के गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। पहले शुरू की गई निविदा प्रक्रिया बीच में रद्द करनी पड़ी और फिर GeM पोर्टल के जरिए पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ी, जिससे सामग्री की आपूर्ति में देरी हुई।
अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल केवल कॉपियां, छाते और यूनिफॉर्म के लिए खरीद आदेश जारी किए गए हैं, जबकि अन्य सामान की खरीद प्रक्रिया अभी जारी है।
पहले अधिकांश सामग्री दो विक्रेताओं से खरीदी जाती थी, लेकिन GeM प्रणाली में अलग-अलग वस्तुओं के लिए अलग-अलग कंपनियों की नियुक्ति करनी पड़ती है, जिससे प्रक्रिया लंबी हो गई है।
■ जल्द पूरा होगा वितरण
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उपलब्ध बचा हुआ स्टॉक कुछ स्कूलों में वितरित किया गया है ताकि छात्रों को राहत मिल सके। नई खेप भी स्कूलों में पहुंचनी शुरू हो गई है और जल्द ही सभी लंबित खरीद प्रक्रियाएं पूरी कर सभी छात्रों को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करा दी जाएगी।
गौरतलब है कि बीएमसी ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की मदद और अभिभावकों पर वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से 2007 में मुफ्त शैक्षणिक किट योजना शुरू की थी। अब इस योजना के तहत सामग्री वितरण में हुई देरी को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।


