■ आधुनिक स्कूल, सशक्त शिक्षक और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिक्षा विभाग को मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को मुंबई स्थित नंदनवन बंगले में स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब चार घंटे चली बैठक में राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।


बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं, पहलों और अब तक हुई प्रगति की जानकारी उपमुख्यमंत्री को दी। विभाग के अच्छे कार्यों की सराहना करते हुए शिंदे ने कहा कि इन योजनाओं और पहलों का लाभ महाराष्ट्र के प्रत्येक स्कूल और विद्यार्थी तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।


उन्होंने स्कूलों के आधुनिकीकरण और शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक, दृश्यमान तथा गुणवत्तापूर्ण बदलाव के लिए स्पष्ट, व्यापक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
शिंदे ने कहा कि आज के बच्चों की आकांक्षाएं और सपने तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में स्कूलों को भी समय के साथ बदलना जरूरी है। महाराष्ट्र के प्रत्येक बच्चे को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने वाली आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है।
■ शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर जोर
उपमुख्यमंत्री ने कार्ययोजना में शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षकों को शामिल करने के निर्देश दिए। शिक्षकों के प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और क्षमता विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने के साथ ही उत्कृष्ट और नवोन्मेषी कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने पर भी जोर दिया गया।
केंद्र सरकार की विभिन्न शिक्षा योजनाओं का महाराष्ट्र में प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक स्कूलों और विद्यार्थियों तक पहुंच सके।
■ विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास प्राथमिकता
शिंदे ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा लेने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास को शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण और मध्यान्ह भोजन योजना की समीक्षा के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
■ अभिभावकों और समाज की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
स्कूलों के विकास में अभिभावकों, पूर्व विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी शिंदे ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की सफल योजनाओं और अच्छे कार्यों की जानकारी प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचनी चाहिए, ताकि स्कूलों में हो रहे सकारात्मक बदलावों से विद्यार्थी, अभिभावक और समाज परिचित हो सकें।
■ सांसद और विधायक स्कूलों को गोद लेने के लिए होंगे प्रोत्साहित
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सांसदों और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों को गोद लेकर उनके विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उपलब्ध निधि और स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्कूलों के विकास को गति देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सरकारी स्कूलों में सुविधाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता में और सुधार किया जा सकता है।
■ कॉर्पोरेट और औद्योगिक क्षेत्र की विशेषज्ञता का उपयोग
सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण में कॉर्पोरेट और औद्योगिक क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं संसाधनों का उपयोग करने पर भी जोर दिया गया। शिंदे ने बताया कि आने वाले सप्ताहों में वे कॉर्पोरेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे।
इन बैठकों के माध्यम से सरकारी स्कूलों के लिए तकनीक, प्रशिक्षण, पेशेवर विशेषज्ञता, संसाधन और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।
■ हर सप्ताह होगी प्रगति की समीक्षा
शिक्षा विभाग की नई कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हर सप्ताह प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में योजनाओं की प्रगति, सामने आने वाली बाधाओं और काम में तेजी लाने के लिए आवश्यक निर्णयों की समीक्षा की जाएगी।
शिंदे ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यदि स्कूल बदलेंगे तो विद्यार्थियों का भविष्य बदलेगा और विद्यार्थियों का भविष्य बदलेगा तो महाराष्ट्र का भविष्य बदलेगा। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे हर अच्छे प्रयास को मिशन मोड में आगे बढ़ाने और उसका लाभ राज्य के प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचाने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।


