मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता एडवोकेट अमोल मातले ने आरोप लगाया है कि बीएमसी के अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है और गरीब मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने घाटकोपर पश्चिम स्थित संत मुक्ताबाई अस्पताल में कथित अव्यवस्था, कर्मचारियों की कमी और मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करने का मुद्दा उठाया।


मातले के अनुसार, 17 अगस्त को डेंगू से गंभीर रूप से बीमार एक मरीज को अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर तत्काल इलाज नहीं दिया गया। इस घटना के बाद उन्होंने पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया और मेडिकल अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे मामले पर जवाब मांगा।


■ केस पेपर से दवा तक 6 घंटे की लंबी प्रक्रिया का आरोप
निरीक्षण के दौरान सामने आई जानकारी का हवाला देते हुए मातले ने आरोप लगाया कि सामान्य मरीज को इलाज के लिए पहले केस पेपर बनवाने में करीब 2 घंटे, डॉक्टर को दिखाने में 2 घंटे और दवाइयां लेने में करीब 2 घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है। उनका कहना है कि इस लंबी प्रक्रिया के कारण मरीजों की परेशानी बढ़ रही है और गंभीर मरीजों की हालत और बिगड़ सकती है।
■ अस्पताल में बड़ी संख्या में पद खाली
मातले ने अस्पताल में स्वीकृत पदों की तुलना में बड़ी संख्या में पद खाली होने का दावा किया। उनके मुताबिक—
डॉक्टर: 70 स्वीकृत पदों में से 44 भरे, 26 रिक्त।
निम्न चिकित्सा कर्मचारी: 42 स्वीकृत पदों में से 19 भरे, 23 रिक्त।
नर्सिंग स्टाफ: 71 स्वीकृत पदों में से 65 भरे, 6 रिक्त।
कामगार वर्ग: 80 स्वीकृत पदों में से 48 भरे, 32 रिक्त।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी का सीधा असर अस्पताल की सेवाओं और मरीजों को मिलने वाले उपचार पर पड़ रहा है।
■ हाउसकीपिंग व्यवस्था पर भी सवाल
अस्पताल की हाउसकीपिंग व्यवस्था को लेकर भी मातले ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसी ने कथित तौर पर अनुबंध के अनुसार पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए हैं। साथ ही उपलब्ध कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने और PF तथा ESIC जैसी सुविधाएं नहीं दिए जाने का आरोप लगाया।
मातले ने हाउसकीपिंग ठेकेदार की जांच और कर्मचारियों के बकाया वेतन तथा अन्य वैधानिक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की।
■ प्रशासन से पांच प्रमुख मांगें
मातले ने 17 अगस्त को मरीज को कथित तौर पर बेड नहीं दिए जाने के मामले की गहन जांच कर दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने अस्पताल में रिक्त डॉक्टर, पैरामेडिकल और चतुर्थ श्रेणी के पद तत्काल भरने की मांग की।
उन्होंने केस पेपर, ओपीडी और दवा वितरण के लिए अतिरिक्त खिड़कियां शुरू करने तथा मरीजों को लंबे समय तक कतार में खड़े रहने से राहत देने की मांग की। अस्पताल में उपलब्ध और खाली बेड की जानकारी देने वाला डिजिटल बोर्ड लगाने की मांग भी की गई है।
■ ‘सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे’
अमोल मातले ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद नागरिकों के लिए बीएमसी अस्पताल सबसे बड़ा सहारा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संत मुक्ताबाई अस्पताल में कथित कुप्रबंधन के कारण मरीजों को इलाज के अभाव में वापस लौटना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि डेंगू जैसे गंभीर मामले में मरीज को समय पर प्राथमिक उपचार और स्थिरीकरण देना अस्पताल की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया तो राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस की ओर से बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान अक्षय खिल्लारी, कार्तिक घोंगे, किरणभाऊ मुके, सत्यवानदादा दलवी, निशांत जाधव, गणेश हाडवले, श्री शिंदे सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।


