■ महिलाओं को प्रगति से रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल होता है, बेड़ियां तोड़कर आगे बढ़ें: राहुल गांधी
मुंबई वार्ता संवाददाता

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में हजारों छात्राओं के साथ संवाद किया। कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में उन्होंने छात्राओं के सवाल सुने और महिलाओं के अधिकार, स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार और समाज में उनकी स्थिति पर विस्तार से बात की।


कांग्रेस ने दावा किया कि राहुल गांधी के कार्यक्रम को रोकने और उसे प्रभावित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की ओर से कथित तौर पर कई तरह के प्रयास किए गए। पार्टी के मुताबिक, छात्राओं को कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के लिए धमकियां दी गईं और कार्यक्रम को बदनाम करने की कोशिश की गई। इसके बावजूद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं की मौजूदगी रही।


राहुल गांधी के पुणे पहुंचने पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, विधान परिषद में कांग्रेस के गुटनेता सतेज पाटील, वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात, नसीम खान और यशोमती ठाकुर समेत कई नेताओं और पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्राओं से सीधा संवाद किया।
■ ‘महिलाओं को पिंजरे में बंद रखने की मानसिकता नहीं चाहिए’
राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों को पिंजरे में बंद रखने वाली मानसिकता वाला भारत हमें नहीं चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों में महिलाओं को सीमित रखने की मानसिकता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां हर व्यक्ति के साथ सम्मान से व्यवहार किया जाए।
उन्होंने कहा, “महिलाओं को दबाकर रखने की मानसिकता मनुस्मृति से आई है और आज हमारी लड़ाई इसी मानसिकता के खिलाफ है।”
‘महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं’
राहुल गांधी ने कहा कि हजारों वर्षों से महिलाओं के अधिकारों को नकारा गया है। उनके मुताबिक महिलाओं को स्वतंत्रता देने के बजाय उन्हें परिवार और सामाजिक व्यवस्था के नाम पर सीमित किया गया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होकर अपनी पहचान बनानी चाहिए। किसी महिला का अपने पिता, भाई, पति या बेटे से रिश्ता हो सकता है, लेकिन वह किसी की संपत्ति नहीं है। उसकी अपनी स्वतंत्र पहचान है।
■ महिलाओं को रोकने के लिए हिंसा के तीन रूप
राहुल गांधी ने कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल अलग-अलग रूपों में किया जाता है। उन्होंने इसे शारीरिक हिंसा, अवसरों से वंचित करने वाली हिंसा और आर्थिक हिंसा के रूप में बताया।
उन्होंने कार्यक्रम में महिला सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े कई आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षित यात्रा, परिवार की अनुमति, घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक दबाव के कारण महिलाओं की स्वतंत्रता सीमित होती है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि बड़ी संख्या में महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं जा पातीं और कई महिलाओं को शादी या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण शिक्षा अथवा रोजगार छोड़ना पड़ता है। उन्होंने महिलाओं के जमीन के मालिकाना हक, रोजगार और वेतन में असमानता जैसे मुद्दे भी उठाए।
■ ‘महिलाओं की पहचान सिर्फ बेटी, पत्नी या मां तक सीमित नहीं’
राहुल गांधी ने कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर केवल तीन भूमिकाओं—बेटी, पत्नी और मां—के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि इन भूमिकाओं में कोई बुराई नहीं है, लेकिन महिलाओं की पूरी पहचान सिर्फ इन्हीं रिश्तों तक सीमित नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि महिलाएं पेशेवर, खिलाड़ी, नेता, निर्माता और उद्यमी सहित अनेक भूमिकाएं निभा सकती हैं। इसके बावजूद कई बार उनकी पहचान किसी पुरुष के साथ उनके रिश्ते के आधार पर तय की जाती है।
राहुल गांधी ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे समाज में प्रगति की राह में आने वाली बेड़ियों को तोड़ें और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाएं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और अवसर मिलना जरूरी है।


