मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र राज्य उर्दू अकादमी के पुनरुद्धार और समर्थन करने की मांग को लेकर उर्दू कबीला फाउंडेशन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से ज्ञापन देकर की है।उन्होंने सरकार अकादमी का फंड बढ़ाकर 2 करोड़ से 8 करोड़ रुपया करने व स्टॉप की कमी को तत्काल भरने की भी मांग सरकार से की है।
उर्दू कबीला फाउंडेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष व भिवंडी निवासी अख्तर काजमी ने महाराष्ट्र राज्य उर्दू अकादमी की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करने तथा इसके पुनरुद्धार और निरंतर समर्थन के लिए हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दिए ज्ञापन में बताया है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगभग 50 वर्ष पहले स्थापित उर्दू अकादमी की परिकल्पना उर्दू और मराठी भाषाओं तथा संस्कृतियों के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में की गई थी।
अकादमी के मूल अधिदेश में 21 सदस्यों और 25 कर्मचारियों वाला एक मजबूत ढांचा शामिल था।लेकिन पिछले छह वर्षों से अकादमी केवल एक कर्मचारी और बिना किसी आधिकारिक सदस्यता के साथ काम कर रही है। इससे इसके मूलभूत उद्देश्यों को पूरा करने की इसकी क्षमता में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई है।उन्होंने अकादमी की पूर्ण सदस्यता और कर्मचारियों को इसके मूल नियमों और विनियमों के अनुसार तत्काल बहाल करने का अनुरोध किया हैं।
उन्होंने बताया है कि अकादमी में पर्याप्त कर्मचारियों की कमी के कारण अकादमी का दैनिक कार्यों के लिए लगभग निष्क्रिय हो गई है। महाराष्ट्र राज्य उर्दू अकादमी के सुचारू और प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कर्मचारियों को तुरंत मंजूरी दिया जाय अकादमी की निधि में वृद्धि करने की मांगउन्होंने बताया है कि अकादमी को आवंटित ₹2 करोड़ का वर्तमान वार्षिक कोष पूरी तरह से अपर्याप्त है। इस कोष का एक बड़ा हिस्सा केवल मुशायरों (काव्य संगोष्ठियों) पर खर्च किया जाता है, जिससे अनुसंधान, प्रकाशन, शैक्षिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसी अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए बहुत कम बचता है।
अकादमी को अपनी विविध जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने और उर्दू भाषा को व्यापक रूप से बढ़ावा देने में सक्षम बनाने के लिए वार्षिक निधि को बढ़ाकर ₹8 करोड़ कर दिया जाए।साथ ही महाराष्ट्र राज्य उर्दू अकादमी अपनी मौजूदा वाली जगह को बरकरार रखे या उसे समान रूप से उपयुक्त और वाला विकल्प प्रदान किया जाए। उचित प्रावधान के बिना कार्यालय को स्थानांतरित करने से अकादमी और भी अस्थिर हो जाएगी और इसकी पहुंच और संचालन में बाधा आएगी।


