श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई महानगरपालिका में हाल ही में हुए बड़े पैमाने पर ट्रांसफर (बदली) मामले ने प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया न रहकर कथित भ्रष्टाचार और लेन-देन के आरोपों के कारण राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।


आरोप है कि ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर “रेट” तय किए जा रहे हैं और “सेटिंग” के जरिए पदों का वितरण किया जा रहा है। पहले स्वीकृत की गई 122 बदलियों को अचानक रद्द किए जाने से पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या नियम बदले गए या फिर कोई गड़बड़ी उजागर होने के कारण यह कदम उठाया गया?


विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि “स्वच्छ प्रशासन” के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर “ट्रांसफर से ट्रांजैक्शन” और “पोस्टिंग से कमीशन” का खेल चल रहा है। यह भी कहा गया कि “Ease of Doing Business” का वादा अब “Ease of Doing Corruption” में बदल गया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रवक्ता एवं युवक मुंबई अध्यक्ष एडवोकेट अमोल मातेले ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की SIT (विशेष जांच टीम) के माध्यम से गहन जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों व राजनीतिक हस्तक्षेप करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही, उन्होंने ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए इसे ऑनलाइन प्रणाली के तहत लाने की भी मांग की। उनका कहना है कि यह मामला मुंबईकरों के विश्वास और सार्वजनिक धन से जुड़ा है, इसलिए सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी है।
मामले को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और आने वाले दिनों में इस पर और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


