■ आर्थिक संकट की चेतावनी.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में हर वर्ष प्रस्तावित 8 प्रतिशत पानी दर (वॉटर टैक्स) बढ़ोतरी पर महापौर द्वारा रोक लगाए जाने की घोषणा के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका के जल अभियंता विभाग में चिंता गहराती जा रही है। विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं का कहना है कि पानी दर में बढ़ोतरी रोके बिना विभागीय खर्चों को संभालना आर्थिक रूप से संभव नहीं होगा।


अभियंताओं के अनुसार, जल अभियंता विभाग पर कर्मचारियों के वेतन व भत्ते, प्रशासनिक खर्च, संचालन एवं रखरखाव, बिजली व्यय और भातसा व अपर वैतरणा बांध से पानी उठाने की लागत का भारी बोझ है। इन सभी खर्चों को ध्यान में रखते हुए स्थायी समिति ने पालिका प्रशासन को प्रतिवर्ष 8 प्रतिशत तक पानी दर बढ़ाने का अधिकार दिया था।


महापौर पद संभालने के बाद रितु तावड़े ने वार्षिक पानी दर बढ़ोतरी पर स्थगन की घोषणा की, जिससे जल अभियंता विभाग में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। अभियंताओं का कहना है कि यदि पानी दर में वृद्धि नहीं की गई, तो पानी आपूर्ति की लागत पूरी करने के लिए पालिका को अन्य आय स्रोतों से धन निकालना पड़ेगा।
वर्तमान में मुंबई महानगरपालिका के विकास कार्यों पर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च अनुमानित है, जिसके चलते पहले ही फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़े जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में पानी दर न बढ़ाने का निर्णय पालिका की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है।सूत्रों के अनुसार, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद तथा आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनाव को ध्यान में रखते हुए पिछले दो वर्षों से पानी दर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। इससे पालिका को अब तक करीब 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
महानगरपालिका को पानी दर से हर वर्ष लगभग 2,300 करोड़ रुपये की आय होती है। वर्ष 2025-26 में यह आय 2,363 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, यदि पानी दर में वृद्धि नहीं की गई, तो पालिका को 150 से 200 करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।


