रविवार से होगी 15 दिवसीय पितृ पक्ष की शुरुआत।

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■ पितृ पक्ष : चंद्र ग्रहण से शुरू, सूर्य ग्रहण से समाप्त.

■ बाणगंगा तालाब पर महापात्र कराएंगे श्राद्ध अनुष्ठान.

■ भाद्रपद की पूर्णिमा पर साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण.

■ सर्व पितृ अमावस्या पर रविवार को आंशिक सूर्य ग्रहण सूतक के चलते 8 घंटे पहले बंद हो जाएंगे मंदिरों के पट.

वरिष्ठ संवाददाता/ मुंबई वार्ता

सनातन संस्कृति में हर वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से क्वार (अश्विन) माह की अमावस्या तक 15 दिवसीय पितृ पूजन के लिए श्राद्ध पक्ष का विधान बनाया गया है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत रविवार 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण के साथ होगी, साथ ही श्राद्ध पक्ष का समापन अश्विन माह की अमावस्या पर आंशिक सूर्य ग्रहण के साथ रविवार 21 सितंबर को होगा।

ज्योतिष के अनुसार एक माह में दो ग्रहण शुभ नहीं माने जाते। इस वर्ष भाद्रपद की पूर्णिमा रविवार 7 सितंबर को विभिन्न शुभ संयोगों में पड़ रही है। साथ ही पूर्णिमा के श्राद्ध पर चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जिससे पितृ पक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण के साथ होगी। हालांकि यह साल का दूसरा चंद्र ग्रहण है लेकिन साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण है जो भारत में दिखाई देगा इसलिए यहां सूतक काल मान्य होगा। चंद्र ग्रहण लगने के 8 घंटे पूर्व से सूतक काल शुरू होता है जिसके साथ ही सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण के मोक्ष काल के बाद मंदिरों का शुद्धिकरण किया जाता है, उसके बाद पुनः दर्शन प्रारंभ होता है।

पंचांग के अनुसार भाद्रपद की पूर्णिमा 7 सितंबर को देर रात (प्रातः) 1:41 बजे शुरू होगी। इसका समापन 7 सितंबर की मध्य रात्रि रात 11:38 बजे होगा। पिछले साल भी पितृ पक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण से हुई थी। इसका समापन सूर्य ग्रहण से हुआ था। यही संयोग इस वर्ष भी बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित माता प्रसाद तिवारी (गुरु जी) के अनुसार सनातन संस्कृति में पितृ पक्ष के 16 दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं।

मान्यता है कि इन दिनों में पितर पितृ लोक से मृत्युलोक में आते हैं। उनके वंशज पितरों के सम्मान में और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्रद्धा से श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि अनुष्ठान करते हैं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देकर धन-धान्य, पुत्रादि से संपन्न करते हैं। पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से प्रारंभ होते हैं और अश्विन अमावस्या पर समाप्त होते हैं। अमावस्या के साथ पूर्वज पितृ लोक लौट जाते हैं। इसे सर्व पितृ अमावस्या, पितृ मोक्ष अमावस्या और महालया भी कहते हैं।

रात 9:58 बजे से ग्रहण, 1:26 बजे मोक्ष इस वर्ष 7 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। इस दिन भाद्रपद महीने की पूर्णिमा भी है। पूर्णिमा पर रात 9:58 बजे से चंद्र ग्रहण शुरू होगा, जो देर रात 1:26 बजे समाप्त होगा। चूंकि चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य है इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा। 7 सितंबर को सूतक काल दोपहर 12:59 बजे से शुरू होगा। सूतक के प्रारंभ होने पर किसी भी तरह के शुभ काम, खरीदारी, पूजा-पाठ, मंदिरों में जाना आदि नहीं करने चाहिए। इसलिए इस दिन दोपहर 12:59 बजे से पहले पहले श्राद्ध, पिंडदान, पवित्र नदियों में स्नान व तर्पण आदि पुण्य काम कर लेने चाहिए।सर्व पितृ अमावस्या पर आंशिक सूर्य ग्रहण रविवार 21 सितंबर को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इस दिन सर्व पितृ अमावस्या होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। हालांकि यह आंशिक सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। चूंकि सूर्य संपूर्ण ब्रह्मांड को आलोकित करता है इसलिए इसका प्रभाव पूरी दुनिया में देखने को मिलेगा। सूर्य ग्रहण अंटार्कटिका, न्यूजीलैंड और प्रशांत महासागर क्षेत्रों से नजर आएगा। इस वर्ष मार्च में पहला सूर्य ग्रहण लगा था। भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण की शुरुआत रविवार 21 सितंबर की रात 10:59 बजे होगी। यह सोमवार 22 सितंबर को प्रातः 3:23 बजे खत्म होगा। ग्रहण का सबसे गहरा समय रात 1:11 बजे रहेगा। यह सूर्य ग्रहण न्यूजीलैंड में करीब 80 प्रतिशत तक ढका दिखाई देगा।

■ पितृ पक्ष की तिथियां व मुहूर्त

पितृ पक्ष तारीख श्राद्ध की तिथियां कुतुप मुहूर्त रौहिण मुहूर्त अपराह्न काल

7 सितंबर, रविवार पूर्णिमा श्राद्ध 11:54 बजे से 12:44 बजे तक 12:44 बजे से 1:34 बजे तक 1:34 बजे से 4:05 बजे तक

8 सितंबर, सोमवार प्रतिपदा श्राद्ध 11:53 बजे से 12:44 बजे तक 12:44 बजे से 1:34 बजे तक 1:34 बजे से 4:04 बजे तक

9 सितंबर, मंगलवार द्वितीया श्राद्ध 11:53 बजे से 12:43 बजे तक 12:43 बजे से 1:33 बजे तक 1:33 बजे से 4:03 बजे तक

10 सितंबर, बुधवार तृतीया श्राद्ध 11:53 बजे से 12:43 बजे तक 12:43 बजे से 1:33 बजे तक 1:33 बजे से 4:02 बजे तक 10 सितंबर, बुधवार चतुर्थी श्राद्ध 11:53 बजे से 12:43 बजे तक 12:43 बजे से 1:33 बजे तक 1:33 बजे से 4:02 बजे तक

11 सितंबर, गुरुवार पंचमी श्राद्ध 11:53 बजे से 12:42 बजे तक 12:42 बजे से 1:32 बजे तक 1:32 बजे से 4:02 बजे तक12 सितंबर,

शुक्रवार, 12 सितंबर, षष्ठी श्राद्ध 11:53 बजे से 12:42 बजे तक 12:42 बजे से 1:32 बजे तक 1:32 बजे से 4:02 बजे तक13 सितंबर,

शनिवार,13 सितंबर सप्तमी श्राद्ध 11:52 बजे से 12:42 बजे तक 12:42 बजे से 1:31 बजे तक 1:31 बजे से 4:00 बजे तक14 सितंबर,

रविवार, 14 सितंबर, अष्टमी श्राद्ध 11:52 बजे से 12:41 बजे तक 12:41 बजे से 1:31 बजे तक 1:31 बजे से 3:59 बजे तक15 सितंबर,

सोमवार, 15 सितंबर, नवमी श्राद्ध 11:51 बजे से 12:41 बजे तक 12:41 बजे से 1:30 बजे तक 1:30 बजे से 03:58 बजे तक16 सितंबर,

मंगलवार, 16 सितंबर, दशमी श्राद्ध 11:51 बजे से 12:41 बजे तक 12:41 बजे से 1:30 बजे तक 1:30 बजे से 3:57 बजे तक17 सितंबर,

बुधवार, 17 सितंबर, एकादशी श्राद्ध 11:51 बजे से 12:41 बजे तक 12:41 बजे से 1:30 बजे तक 1:30 बजे से 3:56 बजे तक18 सितंबर,

गुरुवार, 18 सितंबर, द्वादशी श्राद्ध 11:51 बजे से 12:39 बजे तक 12:39 बजे से 01:28 बजे तक 1:28 बजे से 3:55 बजे तक,

शुक्रवार, 19 सितंबर, त्रयोदशी श्राद्ध 11:51 बजे से 12:39 बजे तक 12:39 बजे से 1:28 बजे तक 1:28 बजे से 3:55 बजे तक,

शनिवार, 20 सितंबर, चतुर्दशी श्राद्ध 11:50 बजे से 12:39 बजे तक 12:39 बजे से 1:27 बजे तक 1:27 बजे से 3:54 बजे तक,

रविवार, 21 सितंबर, सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध 11:51 बजे से 12:38 बजे तक 12:38 बजे से 1:27 बजे तक 1:27 बजे से 3:53 बजे तक।

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