मुंबई वार्ता संवाददाता

सार्वभौम सनातन धर्म महासभा के सौजन्य से कल्याण खड़कपाडा क्षेत्र के गांवमंदिर प्रांगण में हो रही शिवमहापुराण कथा के पांचवे दिन असुरों पर भगवान शिव ने विजय प्राप्त की और देवताओं की रक्षा की। संगीत की धुनों पर भक्तिमय भजनरागों में श्रोतागण झूम उठे।


जगद्गुरु चैतन्य गोपेश्वरदेव महाराज ने आज आध्यात्मिक दृष्टि से कथा के प्रसंगो को व्यक्त किया और मनुष्य जीवन के असली धर्म को बताया।कथा में भस्मासुर, जालंधर, शंखचूण जैसे असुरों पर भगवान शिव की विजय गाथा सुनाते हुए महाराज ने संकेत दिया कि दैत्य भले ही बलशाली हों, भले ही वो भगवान की तपस्या कर वरदान प्राप्त कर लें किन्तु तामसी प्रवृत्ति बुद्धि को हर लेती है और यही वजह है कि उनका पतन निश्चित रूप से होता है। उनमें कोई न कोई कमी ऐसी हो ही जाती है कि वे वरदान के पश्चात भी अपनी उसी कमी की वजह से मारे जाते हैं। इसलिए तामसिक प्रवृत्तियों से दूर रहना ही शिव की सच्ची भक्ति है।
इस कथा आयोजन में प्रतिदिन सुबह रुद्राभिषेक किया जा रहा है। जगद्गुरु महाराज से लोग ज्योतिषीय सलाह भी ले रहे हैं। आयोजन समिति ने भी लोगों के लिए जितना सुलभ हो सके ऐसा प्रयत्न किया है कि वे हर प्रकार से लाभ ले सकें। कथा आयोजन में श्रोतागण जहाँ एक ओर जगद्गुरु के मुखारविन्द से कथा के अद्भुत वृतांत का श्रवण कर रहे हैं वहीं मधुर संगीत गंगा से बह रहे उनके द्वारा गाए जा रहे भजनो पर झूम भी रहे हैं।
मध्यप्रदेश से आए युवा संगीतकार कथा में संगीतरस बहा रहे हैं। तबले पर प्रशांत यादव हैं तो पार्थ परसाई आक्टोपेड पर हैँ। राज दसौन्धी की बोर्ड संभाल रहे हैं और गायक हैं दिनेश कुमावत, इनकी मंडली प्रतिदिन कथा के मध्य अपने भजनो से मंत्रमुग्ध कर रही है।


