रवीन्द्र मिश्रा । मुंबई वार्ता

सिनेमा घरों के वाक्स आफिस पर धूम मचाने वाली फिल्म छावा का जलवा अब राखी बाजार में भी देखने को मिल रहा है । इस वर्ष के रक्षा बंधन त्योहार पर छावा फिल्म वाली राखी की मांग ज्यादा है ।जब कि दूसरे और तीसरे नंबर पर महाकाल,राजमुद्रा तथा त्रिशूल अपनी बढ़त बना रहा है ।


राखी असोसिएशन के महासचिव संजय भाई जैन बताते हैं कि वैसे तो राखी बाजार में हजारों वेराइटी की राखियां विक रहीं हैं ।इन में छावा राखी व्यापारियों की पहली पसंद है । बाजार में बच्चों, जवानों तथा बूढों तक की कलाईयों पर बांधने लायक अनेकों राखियां उपलब्ध है । जहां बहनें छोटे, बड़े उम्र वाले भाईयों के लिए राखियां खरीदतीं है । राखी का त्योहार रिश्तों का त्योहार है ।यह भगवान कृष्ण के जमाने से चला आ रहा है । जब द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर कर कृष्ण की कलाई पर लगे जख्म पर बांधा था । तब श्रीकृष्ण ने महाभारत में चीर हरण में दुर्योधन से उनकी रक्षा किया था ।बहन अपने भाई के हाथ पर यह पवित्र धागा बांध कर अपने जीवन की सुरक्षा का वचन मांगती है ।राखी का यह त्योहार देश के कोने कोने में मनाया जाता है।


इस वर्ष वरसात अच्छी होने से व्यापारियों में उत्साह ज्यादा है । वैसे तो बाजार में सस्ती से सस्ती तथा महंगी से महंगी राखियां उपलब्ध है । लेकिन व्यापारी मध्यम रेंज की राखियां ज्यादा ख़रीद रहे हैं । छोटे बच्चों के लिए आज कल घड़ी के आकार वाली राखी के साथ लबूबू ज्यादा पसंद है । इसी तरह ,पेंडल वाली राखी कुन्दन ,स्टोन लुंबा पेयर, टेडी बीयर, लाइटिंग वाली राखियों की मांग अधिक है जबकि मंगलसूत्र राखी भाई भाभी की राखी ब्लूधागे से बनाई गई ( इवल आईस) जिसे आम भाषा मे नजर बट्टा कहा जाता है । बहनों का मानना है कि यह राखी जब तक भाई के हाथ पर बंथी रहेगी उसे किसी की नजर नहीं लगेगी। इसलिए अक्सर देखने को मिलता है कि रक्षा बंधन के दिन बांधी गई राखी कयी कयी दिन लोगों के हाथों पर देखने को मिल जाता है ।
संजय जैन कहते हैं कि पिछले वर्ष की राखी में राजस्थान के व्यापारी ज्यादा दीखते थे लेकिन इस वर्ष गुजरात पहले पायदान पर आ गया है । राखी का त्योहार एक ऐसा त्यौहार है जहां बरसात की पहली बूंद से राखी इंडस्ट्री सक्रिय हो जाती है । कोंकण,गोवा बंगलुरु, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश सहित कई अन्य राज्यों के व्यापारियों की बुकिंग शुरू हो जाता है ।


