मुंबई वार्ता/ इंद्रीश उपाध्याय

राज्य में करीब 2.5 लाख सरकारी पद खाली हैं. विभिन्न विभागों में पिछड़ा वर्ग के पदों का बैकलॉग भी नहीं भरा गया है। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 10 दिन बाद भी राज्य का मुख्यमंत्री पद खाली है. जबकि राज्य में बेरोजगारों की एक बड़ी फौज है और लाखों युवा पुरुष और महिलाएं नौकरियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, सरकार एक बार फिर संविदा भर्ती शुरू कर चुकी है और शिक्षित युवाओं को नौकरी देने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही है। यह आरोप नाना पटोले ने लगाया है।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने चेतावनी दी है कि – कांग्रेस पार्टी संविदा कर्मचारियों की भर्ती का कड़ा विरोध करती है और इस भर्ती को रद्द करें अन्यथा वे सड़कों पर उतरेंगे।इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों की भर्ती का कड़ा विरोध करती है. इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी हमेशा युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी रही है। इससे पहले बीजेपी गठबंधन सरकार ने संविदा कर्मियों की भर्ती का कड़ा विरोध किया था. पिछली सरकार में उप मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने संविदा भर्ती नहीं करने की घोषणा की थी और 31 अक्टूबर 2023 को संविदा भर्ती का फैसला रद्द कर दिया था. इसके बाद भी सरकार ने स्वास्थ्य विभाग और एमपीएससी के माध्यम से संविदा के आधार पर क्लर्क और टाइपिस्ट की भर्ती की अनुमति दे दी थी. भारतीय जनता पार्टी की करनी और कथनी में अंतर है. अब भी अमरावती जिला सत्र न्यायालय एवं एस. टी। निगम ने यवतमाल जिले के अरनी संभागीय कार्यालय में अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया है। भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पद पर संविदा भर्ती के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था.
खास बात यह है कि कॉन्ट्रैक्ट बेस पर कर्मचारियों की भर्ती का ठेका बीजेपी की ही बगलबच्ची कंपनी को दिया गया है. ऐसा लगता है कि बीजेपी भूल गई है कि बीजेपी गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में कर्मचारियों की भर्ती करने का भी वादा किया था. राज्य में भारी बेरोजगारी है लेकिन बीजेपी को इससे कोई लेना-देना नहीं है.


