लीलावती अस्पताल के पूर्व ट्रस्टियों पर लगा डेढ़ हजार करोड़ की हेराफेरी का आरोप.

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● पूर्व ट्रस्टियों पर लगा काला जादू करने का आरोप.

श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई के सुप्रसिद्ध लीलावती अस्पताल को चलाने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि उसके पूर्व ट्रस्टियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों द्वारा 1500 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का दुरुपयोग किया गया है. लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (एलकेएमएमटी) ने इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और बांद्रा पुलिस स्टेशन में अलग-अलग शिकायतें दर्ज करायी हैं .

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ट्रस्ट पर नियंत्रण हासिल करते ही वर्तमान ट्रस्टियों ने पूर्व ट्रस्टियों द्वारा अस्पताल प्रबंधन के मामलों में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं की पहचान कर फोरेंसिक ऑडिट कराने का निर्णय लिया. ऑडिटरों को पूर्व ट्रस्टियों द्वारा बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, हेराफेरी का पता चला है. फोरेंसिक आडिट के निष्कर्षों के आधार पर वर्तमान ट्रस्टी ने बांद्रा पुलिस स्टेशन में जालसाजी और धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए तीन शिकायतें दर्ज कराईं है. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दिया गया जो मामले की जांच कर रही है .

इसके अलावा गुजरात में लीलावती अस्पताल से कीमती सामान की चोरी के संबंध में भी जांच चल रही है. मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने अस्पताल के तीन पूर्व ट्रस्टियों के खिलाफ 85 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में जांच शुरू कर दी है. एलकेएमएमटी की शिकायत पर पिछले साल 30 दिसंबर को बांद्रा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था और मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश पर इसे ईओडब्ल्यू को स्थानांतरित कर दिया गया था.

अस्पताल के मौजूदा ट्रस्टी के अनुसार उन्हें पता चला कि 2002 से 2023 के बीच आरोपी कथित ट्रस्टियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर ट्रस्ट का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. एक अधिकारी ने बताया कि पूर्व ट्रस्टियों ने चिकित्सा उपकरण खरीदने और निजी खर्चों के बहाने, निजी मामलों के लिए वकील की फीस के रूप में 85 करोड़ रुपये का अवैध उपयोग किया था. उन्होंने बताया कि इसी शिकायत के आधार पर बांद्रा पुलिस थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज किया गया है.

एलकेएमएमटी के परमानेंट रेजिडेंट ट्रस्टी प्रशांत मेहता ने कहा कि, “हमने शिकायतें दर्ज कराईं. इस शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई.”

आडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व ट्रस्टियों ने 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का गबन और दुरुपयोग किया गया है. इन पूर्व ट्रस्टियों में से अधिकांश एनआरआइ है. वे दुबई और बेल्जियम के निवासी हैं. उन्होंने कहा, हम ईडी से अनुरोध करते हैं कि वह मनी लांड्रिंग रोकने के लिए बने कानून पीएमएलए के प्रविधानों के तहत इन वित्तीय अपराधों की जांच में त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करे. यह दावा भी किया गया है कि अस्पताल परिसर में पूर्व ट्रस्टियों ने काला जादू भी किया गया था.

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