मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के विक्रोली पश्चिम स्थित श्रीराम नगर एसआरए योजना की ‘सूर्य नगर मस्जिद एवं मदरसा’ से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अदालत के समक्ष सभी दस्तावेज और तथ्यों का पूर्ण खुलासा करने की हिदायत दी है। शीर्ष अदालत ने विवादित संपत्ति पर 6 अक्टूबर 2026 तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दर्ज किया है।


सामाजिक कार्यकर्ता अनवर शेख की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सूर्य नगर मस्जिद एवं मदरसा के संचालन क्षेत्र को मनमाने तरीके से कम किया गया। याचिका के अनुसार, यह धार्मिक-सह-शैक्षणिक परिसर ग्राउंड प्लस दो मंजिल का है और इसका कुल क्षेत्रफल करीब 9,000 वर्ग फुट यानी लगभग 840 वर्ग मीटर है। हालांकि, एसआरए प्राधिकरण द्वारा भौतिक माप का उचित खुलासा नहीं करते हुए पात्रता क्षेत्र केवल 92.4 वर्ग मीटर निर्धारित किए जाने का आरोप है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि यह कार्रवाई डीसीपीआर 2034 के विनियमन 33(10), गृह विभाग के 5 मई 2011 के शासनादेश तथा झोपड़पट्टी अधिनियम की धारा 3(सी) और 11 के प्रावधानों के विपरीत है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मस्जिद को शामिल करने वाला अनुमोदित योजना लेआउट उपलब्ध न होने के बावजूद तत्कालीन उप जिलाधिकारी श्री तिडके की ओर से धारा 33/38 के तहत बेदखली संबंधी नोटिस जारी किए गए।
बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद मामले को विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी (सी) संख्या 34066/2026) के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा गया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान एक पूर्व हाई कोर्ट आदेश का खुलासा नहीं किए जाने पर याचिकाकर्ताओं को भविष्य में अदालत के समक्ष किसी भी दस्तावेज या तथ्य को छिपाने अथवा रोककर रखने के प्रति सावधान रहने को कहा।
हालांकि, मामले की तात्कालिकता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दर्ज किया कि विकासकर्ता विवादित संपत्ति के संबंध में 6 अक्टूबर 2026 तक यथास्थिति बनाए रखने के लिए सहमत है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी का निपटारा कर दिया।
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 6 अक्टूबर को होने वाली बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच की सुनवाई के दौरान अदालत सभी तथ्यों, एसआरए से संबंधित वैधानिक प्रावधानों और सरकारी अधिसूचनाओं पर विचार कर उचित आदेश पारित कर सकती है। इस प्रकार, मस्जिद एवं मदरसे से जुड़े क्षेत्र, पात्रता और पुनर्विकास संबंधी विवाद पर अंतिम निर्णय अब बॉम्बे हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई में होने वाली कार्यवाही पर निर्भर करेगा।


