■ श्रवण नक्षत्र के साए में रावण दहन एवं शस्त्र पूजा।
● सभी रामलीलाओं में होगा रावण के पुतले का दहन।
वरिष्ठ संवाददाता / मुंबई वार्ता

सनातन संस्कृति में बुराई पर अच्छाई के जीत का महापर्व दशहरा विजयादशमी के रूप में आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर अनादिकाल से मनाया जाता रहा है। रामचरितमानस (रामायण) के अनुसार इसी दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर पृथ्वी को उसके अहंकार, पाप और अत्याचार के भार से मुक्त किया था। इस वर्ष विजयादशमी गुरुवार 2 अक्टूबर को विभिन्न शुभ संयोगों में मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार दशहरे पर 51 साल बाद अत्यंत दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है।


भृगु संहिता आचार्य पंडित राम प्रसाद मिश्र ‘ज्योतिषी’ के अनुसार इस दिन देवी अपराजिता और शस्त्र पूजा का विशेष महत्व है। इस वर्ष दशहरा पर शस्त्र पूजा 2 शुभ योगों में की जाएगी। शस्त्र पूजा के समय सुकर्मा योग, धृति योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। साथ ही श्रवण नक्षत्र का संयोग बन रहा है। आज दशहरे पर मुंबई में चल रही सभी रामलीलाओं में रावण वध के साथ पुतले का दहन किया जाएगा।


ज्योतिषीय गणना के अनुसार 51 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो भारत के लिए सोने पे सुहागा साबित होगा। पंडित राम प्रसाद ने बताया कि पंचांग के अनुसार आज 2 अक्टूबर को सुबह रात 11:29 बजे तक सुकर्मा योग रहेगा। इसके बाद धृति योग प्रारंभ होगा। इसके साथ ही इस दिन पूरे दिन रवि योग पूरे विद्यमान रहेगा। साथ ही श्रवण नक्षत्र सुबह 9:13 बजे से पूरी रात तक रहेगा, जो दशहरे को और भी विशेष बना रहा है।
विजयादशमी का गोचर काल पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का प्रारंभ बुधवार 1 अक्टूबर को शाम 7:02 बजे हो गया है। दशमी तिथि का समापन गुरुवार 2 अक्टूबर को शाम 7:10 बजे होगा। अतः विजयादशमी का पर्व 2 अक्टूबर गुरुवार को मनाया जाएगा। विजय मुहूर्त गुरुवार को दोपहर 1:56 बजे से दोपहर 2:44 बजे तक रहेगा। अपराह्न पूजा मुहूर्त दोपहर 1:09 बजे से 3:31 बजे तक है।
देवी देवताओं के साथ शस्त्र पूजा की परंपरा विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम, मां दुर्गा, भगवान गणेश और हनुमान जी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ इस दिन रामायण पाठ, सुंदरकांड और श्रीराम रक्षा स्तोत्र पाठ करने का महत्व बताया गया है। साथ ही दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन शस्त्र पूजन करने से जीवन में साहस, शक्ति और विजय की प्राप्ति होती है। दशहरे पर 51 साल बाद शुभ और दुर्लभ योगपंचांग के अनुसार इस बार दशहरे पर रवि योग, सुकर्मा योग और धृति योग का निर्माण होने जा रहा है। रवि योग सभी प्रकार की अशुभताओं को नष्ट करने वाला और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है।
सुकर्मा योग अत्यंत शुभ फलदायी होता है। इस योग में शुरू किए गए काम बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं और भाग्य का साथ मिलता है। धृति योग स्थिरता और धैर्य प्रदान करने वाला होता है। बुध और मंगल की युति दशहरे के अगले दिन शुक्रवार 3 अक्टूबर को बुध-मंगल की युति होने जा रही है। बुध ग्रह बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक है, जबकि मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक है।
इन दोनों ग्रहों का मिलन भारत सहित कई देशों के लिए शुभ फल लेकर आएगा। इन दुर्लभ संयोगों के कारण वैश्विक स्तर पर कुछ सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।



विजयदशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं