मुंबई वार्ता संवाददाता

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक मंच (JNUTF) की ओर से 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन JNUTF कार्यालय में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षक समुदाय के प्रति सम्मान व्यक्त करना तथा शिक्षक की सामाजिक, नैतिक एवं राष्ट्र-निर्माणकारी भूमिका को रेखांकित करना था।


कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री माननीय श्री नीरज जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने की। इस अवसर पर JNUTF की अध्यक्ष प्रो. सपना रत्न शाह तथा महामंत्री डॉ. रवि रमेशचंद्र सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं अन्य सहयोगी उपस्थित रहे।


अपने प्रेरक संबोधन में नीरज जी ने शिक्षक की भारतीय परंपरा में प्रतिष्ठा और उसके व्यापक सामाजिक दायित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र का निर्माण करने वाला मार्गदर्शक माना गया है। गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय ज्ञान परंपरा की एक ऐसी विशिष्ट व्यवस्था है, जिसमें शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी बनाना रहा है।
उन्होंने शिक्षक के ज्ञान, संवेदना, अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार शिक्षक का प्रभाव कक्षा की सीमाओं से कहीं आगे तक जाता है। एक संवेदनशील शिक्षक अपने विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने आचरण एवं विचारों के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए आदर्श प्रस्तुत करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने शिक्षक दिवस के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक होना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को दिशा देने का दायित्व है। उन्होंने कहा कि शिक्षक की वास्तविक शक्ति उसके पद में नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, संवेदना और अपने विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता में निहित होती है। शिक्षक जब अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए कार्य करता है, तभी शिक्षा वास्तव में राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनती है।
प्रो. सपना रत्न शाह, अध्यक्ष JNUTF, ने सभी उपस्थित शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए शिक्षक समुदाय की गरिमा, एकता और अकादमिक स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक ज्ञान-सृजन के साथ-साथ समाज को वैचारिक दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. रवि रमेशचंद्र, महामंत्री JNUTF, ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं शिक्षक साथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने की JNUTF की प्रतिबद्धता को दोहराया।कार्यक्रम का वातावरण गुरु-शिष्य परंपरा, सम्मान, आत्मीयता और राष्ट्र-निर्माण की भावना से ओत-प्रोत रहा।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि एक सच्चा शिक्षक केवल विषय का अध्यापक नहीं होता, बल्कि वह चरित्र-निर्माता, मार्गदर्शक और समाज के भविष्य का निर्माता होता है। अंत में सभी उपस्थित शिक्षकों ने शिक्षक के गौरव, ज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।


