मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

अक्कलकोट में संभाजी ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण गायकवाड़ के चेहरे पर काली स्याही लगाई गई। यह हमला संगठन के नाम पर छत्रपति संभाजी महाराज का उल्लेख करने और स्वामी समर्थ का अपमान करने के आरोप में किया गया। इस हमले के बाद हमलावर दीपक काटे समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।


इस घटना के बाद काफी नाराजगी जताई जा रही है और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। गायकवाड़ ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनकी हत्या एक साजिश थी जिसके लिए राज्य सरकार ज़िम्मेदार है।दाभोलकर, कलबुर्गी, गौरी लंकेश और पानसरे की हत्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये हमले इसलिए किए गए क्योंकि ये उनकी विचारधारा के खिलाफ थे।
गायकवाड़ को संदेह था कि उन्हें खत्म कर दिया जाएगा क्योंकि संभाजी ब्रिगेड की विचारधारा संविधान के अनुरूप है। इस घटना के पीछे दीपक काटे का नाम आ रहा है जो कि भाजपा कार्यकर्ता और शिव धर्म फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उन्हें चंद्रशेखर बावनकुले का करीबी कार्यकर्ता माना जाता है।चार साल पहले, उन्होंने संभाजी ब्रिगेड का नाम बदलने के लिए भूख हड़ताल की थी। ६ जनवरी, २०२५ को काटे जब पुणे हवाई अड्डे से हैदराबाद जा रहे थे, तब उनके बैग से एक पिस्तौल और अट्ठाईस कारतूस मिली थी।
सांसद सुप्रिया सुले और शरद पवार ने गायकवाड़ से फोन पर पूछताछ की। सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक अमोल मिटकरी ने भी हमले की निंदा की है महाराष्ट्र का सामाजिक स्वास्थ्य न बिगड़े, यह सुनिश्चित करने की अपील की गई है।


