मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के पूर्व उप महापौर और शिवसेना नेता बाबू भाई भवानजी ने कहा कि भारतीय कृषि क्षेत्र का भविष्य केवल अधिक सब्सिडी देने में नहीं, बल्कि कृषि की वैल्यू चेन मजबूत करने, डिजिटल तकनीक और AI आधारित सलाह अपनाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के विकल्प विकसित करने में है।


किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए भवानजी ने कहा कि मौसम और कृषि उपज की कीमतों में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव के बीच किसानों की आय को स्थिर रखने के लिए खेती से जुड़े बुनियादी ढांचे और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। उन्होंने कहा कि AI आधारित कृषि सलाह किसानों को मौसम, फसल और बाजार से जुड़ी बेहतर जानकारी उपलब्ध करा सकती है।


भवानजी ने तिलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात केंद्रित प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की जरूरत है। भूजल का टिकाऊ इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए केवल कीमत आधारित सहायता देने के बजाय उत्पादकता बढ़ाने वाले सुधारों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो मौसम के अनुकूल, तकनीक आधारित और बाजार से सीधे जुड़ी हो।
भवानजी ने जैविक खेती और कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि बदलते जलवायु और जल संकट के दौर में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्पों को भी अपनाना होगा।
गौरतलब है कि मुंबई के पूर्व उप महापौर बाबू भाई भवानजी स्वयं किसान परिवार से आते हैं। अपने पैतृक गांव कच्छ में उन्होंने सामूहिक खेती का मॉडल अपनाकर किसानों के सामने एक वैकल्पिक रास्ता प्रस्तुत किया है। उनके इस कृषि मॉडल की गुजरात में चर्चा हुई है और कई गांवों के किसानों ने इसे अपनाया है।


