शिव पूजन पांडेय/मुंबई वार्ता

बिहार के सुपौल जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने समाज में महिलाओं की शिक्षा को लेकर सकारात्मक सोच को मजबूती दी है। यह कहानी एक सास और उसकी नाबालिग बहू की है, जहाँ परंपराओं से हटकर सास ने बहू के भविष्य को संवारने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया।


कम उम्र में शादी हो जाने के बावजूद सास ने यह सुनिश्चित किया कि बहू की पढ़ाई अधूरी न रहे। उन्होंने खुद स्कूल जाकर बहू का नामांकन नौवीं कक्षा में कराया, और एक नई सामाजिक चेतना का संचार किया।परंपराओं से अलग सोचभारत के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लड़कियों की कम उम्र में शादी आम बात है, जिससे उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है और वे घरेलू जिम्मेदारियों तक ही सीमित हो जाती हैं।
सुपौल जिले की इस सास ने परंपरागत सोच को तोड़ते हुए बहू की पढ़ाई को वरीयता दी। यह कदम सिर्फ एक घर की कहानी नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सोच में बदलाव की एक शुरुआत है।


