■ पेपर लीक, भर्ती में अव्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर घेरा; बोले—विद्यार्थियों की समस्याएं सुलझाने के बजाय आंदोलनकारियों पर हो रही है कार्रवाई
मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव एडवोकेट अमोल मातेले ने राज्य की महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ‘सीएम-सृष्टी’ योजना की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पेपर लीक, सरकारी नौकरियों की भर्ती में अव्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी के कारण विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है, लेकिन सरकार इन बुनियादी समस्याओं का समाधान करने के बजाय नई योजनाओं के जरिए अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।


मातेले ने अपने प्रेस वक्तव्य में ‘सीएम-सृष्टी’ योजना पर कटाक्ष करते हुए इसे ‘सीएम-तुष्टी’ और विद्यार्थियों के भविष्य को नुकसान पहुंचाने वाली योजना बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपने अधिकारों और मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों की समस्याएं सुनने के बजाय उन पर दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, आंदोलन करने वाले युवाओं को कथित तौर पर ‘शहरी नक्सलवादी’ बताकर बदनाम किया जा रहा है और उनके साथ मारपीट की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
■ युवाओं की समस्याओं पर सरकार को घेरा
एडवोकेट मातेले ने सवाल उठाया कि जिस राज्य में सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षाएं आयोजित करने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहां शोध और तकनीकी विकास के दावों का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा कि शासन के निर्णयों और योजनाओं में नवाचार तथा अनुसंधान की बातें की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आवश्यक प्रयोगशालाओं और सुविधाओं की उपलब्धता पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगार युवा रोजगार के अवसरों के लिए परेशान हैं, जबकि सरकार नई योजनाओं के प्रचार में जुटी है।
मातेले ने सरकार पर सत्ता में बने रहने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज और अन्य कार्रवाई करने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने की मांग की।
■ चुनाव के मद्देनजर नई योजनाएं लाने का आरोप
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही सरकार नई-नई योजनाओं की घोषणा कर रही है, जबकि शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। इसके लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, निष्पक्ष परीक्षाएं, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
मातेले ने चेतावनी दी कि दमनात्मक कार्रवाई के जरिए युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को विद्यार्थियों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने अपने वक्तव्य के अंत में दावा किया कि विद्यार्थी और युवा सरकार की नीतियों से नाराज हैं तथा आगामी चुनावों में वे अपने मताधिकार के जरिए सरकार को जवाब देंगे। हालांकि, ‘सीएम-सृष्टी’ योजना को लेकर लगाए गए आरोप और सरकार की नीतियों पर की गई आलोचना मातेले के राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा हैं।


