● मेरी बिल्ली, मुझी से म्यांऊ…
श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मेरी बिल्ली, मुझी से म्यांऊ… वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए उबाठा सांसद संजय राऊत ने राष्ट्रवादी कॉंग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार के ख़िलाफ़ बयानबाजी की है. हमेशा से शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति की सीढ़ियां चढ़ने वाले संजय राऊत ने शरद पवार को यह बताने की धृष्टता की है कि उन्हें राजनीति में रहते हुए क्या नहीं करना चाहिए.


दरअसल दिल्ली में 21 फरवरी से 28 फरवरी तक आल इंडिया मराठी साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया है. संस्था के इस 98 वे कार्यक्रम में शरद पवार को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. गत 11 फरवरी को शरद पवार ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ‘महादजी शिंदे राष्ट्रीय गौरव’ पुरस्कार से सम्मानित किया था.


इस कार्यक्रम में शरद पवार ने महायुति नेता एकनाथ शिंदे की जमकर तारीफ की थी. उन्होंने कहा था, “एकनाथ शिंदे एक ऐसे नेता हैं जो हाल के समय के नागरिक मुद्दों से अवगत हैं. उन्होंने ठाणे नगर निगम, नवी मुंबई नगर निगम और राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सही दिशा देने का काम किया. उन्होंने अपनी सोच को पार्टी तक सीमित न रखते हुए सभी दलों के नेताओं के साथ सामंजस्यपूर्ण संवाद बनाए रखते हुए राज्य और लोगों की समस्याओं का समाधान किया. उनके काम निश्चित रूप से महाराष्ट्र के इतिहास में दर्ज किए जाएंगे.”
इसको लेकर अब उद्धव ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने बड़ा हमला किया है. सांसद संजय राऊत ने कहा कि,” उन्हें शरद पवार से यह उम्मीद नहीं थी. शरद पवार द्वारा एकनाथ शिंदे का सम्मान करना महाराष्ट्र की अस्मिता और स्वाभिमान पर आघात है.”
उन्होंने कहा कि,” हो सकता है शरद पवार की भावनाएं अलग हों, वह वरिष्ठ नेता हैं, हम उनका सम्मान करते हैं, लेकिन हम उन लोगों के खिलाफ हैं जिन्होंने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को तोड़ा और महाराष्ट्र को कमजोर किया.”
संजय राउत ने यह भी कहा, “गूगली डालने वाले शरद पवार आज खुद हिट विकेट हो गए हैं. उन्हें एकनाथ शिंदे को अपनी बातों से सम्मानित नहीं करना चाहिए था और उस कार्यक्रम में भी शामिल नहीं होना चाहिए था.”
संजय राउत ने कहा कि हमने पवार के बारे में अपनी पार्टी की भावनाएं व्यक्त की हैं. दिल्ली में कोई साहित्यिक सम्मेलन नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलाली है.
उन्होंने कहा कि ,”मेरा साहित्यिक सम्मेलन आयोजकों से एक सवाल है. आप मराठी की क्या सेवा कर रहे हैं? जो मराठी की गर्दन पर पैर रख रहे हैं, उनका सत्कार किया जा रहा है. मुझे साहित्य सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है, लेकिन मैं सम्मेलन में नहीं जाऊंगा. अगर आयोजकों के पास पैसे की कमी थी, तो उन्हें महाराष्ट्र आना चाहिए था.”
राजनीतिक गलियारों में शरद पवार पर संजय राऊत के बयान को हल्के में लिया जा रहा है. इस बयान को लेकर मेरी बिल्ली, मुझी से म्यांऊ… वाली कहावत बोलते लोग नजर आ रहे है. यह बात जगजाहिर है कि महाराष्ट्र की राजनीति में संजय राऊत हमेशा से शरद पवार की उंगली पकड़कर चले है. यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के नेता भी उन्हें शरद पवार का ही चेला बताते रहे हैं.
चर्चा यह भी है कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तारीफ कर, शरद पवार ने राजनीतिक परिपक्वता का बेहतरीन उदाहरण दिया है.


