शैलेन्द्र व शारदा सिन्हा को समर्पित कल्पना पटवारी और मनोज भावुक का भोजपुरी ग़ज़ल ‘तनी-तनी सा बात के’ जारी ।

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मुंबई वार्ता/राजेश विक्रांत

मनोज भावुक भोजपुरी के स्थापित ग़ज़लकार हैं। कल्पना पटवारी भोजपुरी की लोकप्रिय गायिका हैं और इधर कई वर्षों से भोजपुरी गीतों को लेकर अनेक प्रयोगों के लिए भी चर्चित हैं। मनोज के अल्फ़ाज़ और कल्पना की आवाज़ में संगीत प्रेमियों के लिए एक तोहफा है, भोजपुरी ग़ज़ल – ‘तनी-तनी सा बात के’। म्यूजिक बॉक्स पर यह ग़ज़ल जारी हुई है। धुन तैयार किया है अखिलेश कुमार ने। प्रोग्रामर हैं सैफ अली और वायलिन वादक हैं अलीम खान।

जहाँ पर भोजपुरी गीत औरतों का कमर चाकर-पातर करने में लगा है, कमरिया में पीर का इलाज ढूँढ रहा है, वहीं जीवन के मर्म को उजागर करता यह ग़ज़ल आपको अलग सकून देगा। इस ग़ज़ल को लेकर मनोज भावुक ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है – ”2004 में मेरी किताब आई – तस्वीर जिंदगी के ( भोजपुरी ग़ज़ल-संग्रह) … तब मैं अफ्रीका में नौकरी करता था। 2006 में इसी किताब के लिए भारतीय भाषा परिषद सम्मान मिला गुलज़ार जी और गिरिजा देवी के हाथों। तब मैं लंदन में नौकरी करता था। सम्मान के बाद बीबीसी लंदन में साक्षात्कार हुआ। दुनिया के बड़े अखबारों में छपा और एक भोजपुरी गजलगो के रूप में पहचान मिली। तब से अब तक अनगिनत मंचों, रेडियो और टीवी पर काव्य-पाठ में गजलें पढ़ता रहा। उन्हीं में से एक ग़ज़ल है …” तनी-तनी सा बात के”।

आप में से बहुत से लोगों ने सुना होगा। एक इंटरव्यू में पद्म विभूषण शारदा सिन्हा ने मेरे इस ग़ज़ल की तारीफ़ की थी। कल्पना पटवारी की आवाज़ में इस ग़ज़ल का ऑडियो आज जारी हुआ है। उन्होंने इसे शारदा दीदी को समर्पित किया है। परवेज ने यह टीजर भेजा है और कहा है कि वीडियो भी जल्द जारी करेगें। भोजपुरी सिनेमा के पहले गीतकार और हिंदी-भोजपुरी सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ गीतकार शैलेन्द्र के जन्मदिन पर भोजपुरी की अस्मिता को बढ़ाने वाले इस गीत को सुनिये और सिर्फ सुनिये ही नहीं, सोचिए भी।

भोजपुरी गीतों को लेकर सोचना जरूरी है। हम व्यूज के चक्कर में बिना सोचे-समझे कुछ भी गाये जा रहे हैं। व्यूज ( नम्बर ) से ज्यादा व्यू ( नजरिया ) जरूरी है। रोटी के साथ प्रतिष्ठा भी जरूरी है।

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