राज्य सरकार ने ‘ओसी अभय योजना’ को हरीझंडी दे दी, अब 1962 की डेटम लाइन की सीमा को 2011 तक बढ़ाने का निर्णय भी शीघ्र लिया जाए – गोपाल शेट्टी पूर्व सांसद

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मुंबई वार्ता संवाददाता

गोपाल शेट्टी के नेतृत्व वाली ‘भाजपा ओसी अभ्यास कमिटी’ का अभ्यास आखिरकार रंग ले आया है। ओसी विहीन इमारतों में रहनेवाले हजारों फ्लैटधारकों के हित में अभ्यास कमिटी के सुझाव के बाद राज्य सरकार ने ओसी अभय योजना को हरीझंडी दे दी है। सरकार के इस जनहित वाले फैसले का पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने स्वागत किया है और इसके साथ-साथ उन्होंने सांस्कृतिक कार्य मंत्री तथा उप नगर के पालक मंत्री एड. आशिष शेलार को पत्र भी लिखा है।

जनसेवक गोपाल शेट्टी ने पत्र में उल्लेख करते हुए कहा है कि ताड़देव की वेलिंगटन सोसायटी का मामला अदालत में आने के बाद (जिसमें ओसी न होने के कारण संबंधित इमारत को खाली करने का अदालत द्वारा आदेश दिया गया) उस घटना के बाद मैं बहुत बेचैन हो गया था, क्योंकि मुंबई महानगर पालिका में नगरसेवक के रूप में काम करते हुए, ओसी न मिलने वाली इमारतों के बारे में मैंने गहन अध्ययन किया था, इसलिए इस विषय की जटिलता मुझे अच्छी तरह से पता थी। अगर अदालत का वह आदेश सभी ओसी विहीन इमारतों पर लागू होता, तो मुंबई शहर में भारी अशांति फैल जाती और नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता। इसलिए मुझे इस मामले में पहल करनी पड़ी।

जनसेवक शेट्टी ने आगे लिखा है कि शुरुआत में कई लोगों ने सवाल उठाया भी कि “मुंबई की बहुमंजिला इमारतों के मुद्दे में गोपाल शेट्टी को हस्तक्षेप करने की क्या जरूरत है?” लेकिन उस क्षेत्र के विधायक और मुंबई के पालकमंत्री मंगलप्रभात लोढा जी ने खुद मुझसे इस मामले में ध्यान देने का अनुरोध किया था। इसके बाद मैंने मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम जी से एक समिति गठित करने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया और मुझे उस समिति का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद जब मैंने आपसे भी मुलाकात की, तो आपने भी तुरंत संयुक्त बैठक का आयोजन किया और नगर विकास विभाग के उप सचिव असीम गुप्ता जी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए। आपके नेतृत्व में आयोजित कई बैठकों के कारण अल्पावधि में ही यह निर्णय सामने आया है। इस सफल निर्णय में आपका महत्वपूर्ण योगदान है, इसे मैं नम्रतापूर्वक स्वीकार करता हूं और एक बार फिर से मुंबई शहर के नागरिकों की ओर से आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

उन्होंने यह भी लिखा कि- मुझे विश्वास है कि यह निर्णय केवल मुंबई तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में पूरे महाराष्ट्र के लिए लागू किया जाएगा। इसी तरह, मैंने पहले जिन चार महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया था, उनमें से एक संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में पुनर्वसन के मामले में भी अदालत ने सरकार को आदेश दिया है, जिससे मुझे विश्वास है कि यह मामला भी जल्द ही सुलझ जाएगा। तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा 1962 की डेटम लाइन की सीमा को 2011 तक बढ़ाने का है, जिसके लिए भी मैंने आपसे अनुरोध किया था। आपने श्री असीम गुप्ता के साथ बैठक करके उस पर भी समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने यह भी लिखा कि-अब मेरा आपसे नम्र निवेदन है कि इस मामले को जल्द से जल्द अंतिम रूप दें, क्योंकि मुंबई जैसे शहर में निजी जमीन पर झुग्गीवासियों को कुछ जगहों पर स्लम घोषित न होने के कारण शिकायतकर्ता अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं और इन आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हाल ही में, दहिसर (पूर्व) में शुक्ला कंपाउंड के मामले में, अशोक जैन नामक एक डेवलपर ने जमीन खरीदने के बाद 1962 की डेटम लाइन के सरकारी कानून का आधार लेकर अदालत के माध्यम से कई घरों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कराई है। इससे उस क्षेत्र के नागरिकों में भय का माहौल बन गया है। मैं इस मुद्दे पर लगातार अनुसरण कर रहा हूं, और मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि 1962 की डेटम लाइन की सीमा को 2011 तक बढ़ाने का निर्णय तुरंत लें। इसमें सरकार का एक रुपया भी खर्च नहीं होगा और हजारों नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

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