धनतेरस से लेकर भाई दूज तक मनाई जाएगी दीवाली।

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■71 साल बाद दीवाली पर बन रहा दुर्लभ उत्तम संयोग।

■ दीपावली : इस वर्ष पांच नहीं 6 दिन मनेगा दीपोत्सव।

■ सोमवार 20 अक्टूबर को विभिन्न शुभ योगों में लक्ष्मी पूजन।

■ 18 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक छह दिवसीय दीपोत्सव.

वरिष्ठ संवाददाता/ मुंबई वार्ता

प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या पर दीपोत्सव का पर्व, दीवाली धूमधाम से आस्था के साथ मनाई जाती है। इस वर्ष अमावस्या दो दिन पड़ने से दीवाली पर लक्ष्मी पूजन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस असमंजस को देखते हुए मुंबई वार्ता, महानगर के चुनिंदा ज्योतिषियों और मुहूर्त विशेषज्ञों की राय के आधार पर अपने पाठकों के लिए भ्रम दूर करते हुए पांच दिवसीय दीपोत्सव और दिवाली पर लक्ष्मी पूजन मुहूर्त की जानकारी उपलब्ध करा रहा है। इस वर्ष दीपावली पर 71 साल बाद दुर्लभ उत्तम संयोग बनने जा रहा है। इसके तहत हंस राजयोग, बुधादित्य योग, आदित्य मंगल योग और कलानिधि योग का निर्माण होने जा रहा है।

पंचांग के अनुसार पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 18 अक्टूबर को धनतेरस के साथ हो रही है जो 23 अक्टूबर को भाई दूज के साथ समाप्त होगी। इस तरह इस वर्ष दीपोत्सव पांच की जगह छह दिन तक मनाया जाएगा। इस दौरान सोमवार 20 अक्टूबर को विभिन्न शुभ संयोगों में दिवाली पर लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य.पंडितकृष्णात्रिपाठी ने बताया कि सनातन हिंदू धर्म में दीपावली का विशेष महत्व है। यह लक्ष्मी पूजा का सबसे बड़ा पर्व होता है। दीपावली महापर्व पांच दिन तक मनाया जाता है, ये पांच दिन ‘पांच दिवसीय दीपोत्सव’ कहलाते हैं।

71 साल बाद बन रहा है शुभ ग्रह संयोगभृगु संहिता आचार्य पंडित राजू मिश्र ‘ज्योतिषी’ के अनुसार इस बार दिवाली पर गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में रहेंगे, साथ ही सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा। वहीं, मंगल और सूर्य की युति से आदित्य मंगल योग और चंद्र-शुक्र की युति से कलानिधि योग का बन रहा है। इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। ये सभी योग 1954 के बाद इस वर्ष 2025 में बन रहे हैं, जो कुंडली के अनुसार देश के लिए अत्यंत उत्तम संयोग है।अमावस्या का गोचर कालवैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत सोमवार 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे से हो रही है। इसका समापन अगले दिन मंगलवार 21 अक्टूबर को शाम 5:55 बजे होगा।

इसके बाद प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो जाएगी। 21 अक्टूबर की मध्य रात निशीथ काल में अमावस्या तिथि नहीं रहने से लक्ष्मी पूजन सोमवार 20 अक्टूबर को ही किया जाएगा।

■ प्रदोष और निशीथ काल में अमावस्या.

पंडित राम प्रसाद मिश्र एवं डॉ. अशोक मिश्र ने निर्णय सिंधु का हवाला देते हुए कहा कि दीपावली पर्व में रात्रि व्यापिनी अमावस्या की मान्यता रहती है। इस वर्ष 20 अक्टूबर को प्रदोष काल में भी अमावस मिल रही है और रात्रि काल में भी अमावस्या है। ऐसे में 20 अक्टूबर सोमवार को दीपावली पर्व सभी को मनाना चाहिए।

■ क्या कहता है काशी विद्वत परिषद

काशी विद्वत परिषद पहले ही सोमवार 20 अक्टूबर को दिवाली मनाए जाने को उचित ठहरा चुका है। काशी विद्वत परिषद के अनुसार विद्वत परिषद ने धर्म शास्त्र निर्णय सिंधु, मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रंथों में दी गई व्यवस्था के अनुसार सर्वसम्मति से सोमवार 20 अक्टूबर को दीवाली मनाने का फैसला किया है। इसके चलते अयोध्या, मथुरा, काशी और पुरी आदि सभी प्राचीन पुरियों में 20 अक्टूबर को ही दिवाली मनाई जाएगी। धनतेरसदीपावली महापर्व के दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है।

यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस वर्ष शनिवार 18 अक्टूबर को धन्वंतरि भगवान (आयुर्वेद के देवता) और कुबेर देव की पूजा की जाती है। इस दिन समुद्र मंथन से धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए धनतेरस के पर्व को आरोग्य और धन की स्थिरता का प्रतीक माना गया है। छोटी दिवाली-नरक चतुर्दशी दीपोत्सव के दूसरे दिन छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी मनाया जाता है। इस बार यह पर्व रविवार 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।

छोटी दिवाली के दिन भगवान श्री कृष्ण और यमराज की पूजा की जाती है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था इसलिए इसे नरक चतुर्दशी कहा गया। गणेश-लक्ष्मी पूजनदीपोत्सव का सबसे बड़ा पर्व है गणेश-लक्ष्मी पूजन का होता है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस वर्ष सोमवार 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दीपक जलाकर पूरे परिवार के साथ गणेश-लक्ष्मी के साथ कुबेर देव की भी पूजा की जाती है।

अमावस्या चंद्र रहित होने से इस अंधकार में दीप प्रज्वलन ज्ञान का प्रतीक है। गोवर्धन पूजादीपावली का चौथा पर्व गोवर्धन पूजन होता है। इस पूजा को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा बुधवार 22 अक्टूबर को की जाएगी। इस दिन गोबर से घर घर गोवर्धन महाराज बनाए जाते हैं और पूरे परिवार के साथ पूजन किया जाता है। भाई दूज (भाऊ बीज)दीपोत्सव का अंतिम पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भाई दूज के रूप में मनाया जाता है।

हर वर्ष यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व गुरुवार 23 दिन अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाइयों को तिलक कर उनके दीर्घायु की कामना करती हैं और फिर भाई उपहार स्वरूप वस्त्र या मिठाई देते हैं। भाई दूज का पर्व प्रेम, स्नेह और दीर्घायु का प्रतीक है। इस वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी दो दिन पड़ेगी, जिससे दीपोत्सव 6 दिनों का हुआ है।

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