मुंबई वार्ता संवाददाता

जनसंपर्क क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ और लेखक डॉ. विजय ढवले द्वारा लिखित अनिल त्रिवेदी का आत्मचरित्र ‘असा असावा जनसंपर्क’ तथा इस पुस्तक का आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली द्वारा किया गया हिंदी अनुवाद ‘जीवन ही जनसंपर्क’ का शानदार लोकार्पण समारोह प्रभादेवी स्थित रविंद्र नाट्य मंदिर में संपन्न हुआ।


कार्यक्रम का लोकार्पण महाराष्ट्र राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशिष शेलार के हाथों हुआ। इस अवसर पर कला, शिक्षा, समाज और मीडिया जगत के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति रही।


जनसंपर्क की जीवन यात्रापुस्तक में अनिल त्रिवेदी की जीवन यात्रा के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि जनसंपर्क केवल सूचना प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने और संवाद स्थापित करने की एक जीवनशैली है। संघर्ष और अनुभवों से भरी यह यात्रा पाठकों को प्रेरणा देने वाली है।
● मंत्री आशिष शेलार की प्रशंसा
लोकार्पण अवसर पर संबोधित करते हुए मंत्री एड. आशिष शेलार ने कहा कि “जनसंपर्क केवल मीडिया या प्रसिद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और व्यक्ति को जोड़ने वाली ऊर्जा है। अनिल त्रिवेदी के जीवन से युवा पीढ़ी को दिशा और प्रेरणा मिलेगी।”
हिंदी अनुवादक अनिल गलगली ने कहा कि मराठी मूल पुस्तक में प्रस्तुत विचार और जीवन मूल्य देशभर के पाठकों तक पहुँचें, इसी उद्देश्य से ‘जीवन ही जनसंपर्क’ का अनुवाद किया गया। “जनसंपर्क एक दृष्टिकोण है और जीवन जीने की कला है”, यह भावना पुस्तक में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
समारोह के समारोप में उपस्थित सभी अतिथियों ने पुस्तक के विषय, शैली और संदेश की सराहना की। जनसंपर्क जगत में यह पुस्तक एक प्रेरणादायी दस्तावेज के रूप में स्थान बनाएगी और पाठकों के बीच व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त करेगी, ऐसा विश्वास आयोजकों ने व्यक्त किया।
■ समारोह में विशेष रूप से उपस्थित थे—पद्मश्री अनुप जलोटा, सुरेश वाडकर, विश्वनाथ सचदेव, पूर्व सांसद राहुल शेवाळे, एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय की पूर्व कुलगुरू डॉ. वसुधा कामत, मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरू डॉ. राजन वेलूकर, वेदांत विद्वान स्वामी अनिकेत शास्त्री देशपांडे, पूर्व आईएएस अधिकारी एवं विचारक अविनाश धर्माधिकारी, पुस्तक के हिंदी अनुवादक अनिल गलगली, तथा प्रकाशन कार्य में सहयोगी माधव पोंक्षे।



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