मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य की 288 नगरपालिका चुनावों में कांग्रेस पार्टी को अच्छा जनादेश मिला है। 41 नगराध्यक्षों सहित 1006 नगरसेवक विजयी हुए हैं। नगरसेवकों की कुल 2000 सीटों में कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही है। नगरपालिका चुनावों में दिखा यह जनसमर्थन का तूफ़ान महानगरपालिकाओं के चुनावों में भी दिखाई देगा—ऐसा विश्वास व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने जनता से भाजपा महायुति की लोकतंत्र-विरोधी तानाशाही और ‘ठोकशाही’ को करारा सबक सिखाने का आह्वान किया।


नागपुर में आयोजित पत्रकार परिषद में प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी कराना चुनाव आयोग का संवैधानिक कर्तव्य है, लेकिन उसकी भूमिका देखकर लगता है कि उसने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। वोट चोरी का मुद्दा कांग्रेस ने उठाया, अंततः चुनाव आयोग को मानना पड़ा कि मतदाता सूचियों में गंभीर गड़बड़ियाँ हैं, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के इशारे पर काम करता हुआ दिखाई देता है
।मतदाता सूचियों में गड़बड़ी, मतदान प्रक्रिया के लिए बार-बार तारीखें बदलना, नामांकन के समय विपक्ष को रोका जाना और सत्ताधारियों को खुली छूट देना, रात 10 बजे तक प्रचार की अनुमति—यानी एक तरफ पैसे बाँटने की छूट और दूसरी तरफ मतदान केंद्रों की अनदेखी—यही तस्वीर सामने है। ‘हम सुधार नहीं करेंगे’ यही रुख चुनाव आयोग का प्रतीत होता है। चुनाव आयोग, प्रशासन और सत्ताधारी दलों ने लोकतंत्र की सभी मर्यादाओं को कुचल दिया है; खुलेआम तमाशा चल रहा है।


■ बिनविरोध के लिए सत्ताधारी दल का तमाशा
नगरपालिका और अब महानगरपालिका चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाई है। उनकी मदद के लिए पुलिस, मंत्री, उनके पीए ही नहीं बल्कि चुनाव आयोग भी खड़ा दिखाई देता है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की भूमिका भी जुड़ गई है।
नार्वेकर ने अपने भाई, बहन और भाभी को बिनविरोध कराने के लिए अत्यंत असभ्य व्यवहार किया, गुंडागर्दी की और विपक्ष को धमकाया। इसके सीसीटीवी फुटेज प्रशासन द्वारा गायब कर दिए गए। हर ओर से शिकायतों के बाद जाँच के आदेश तो दिए गए, लेकिन नार्वेकर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।बिनविरोध चुनावों पर कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट किया है। जहाँ बिनविरोध चुनाव हुए हैं, वहाँ NOTA का विकल्प दिया जाए—यह हमारी मांग है। इस विषय में न्यायालय जाने को लेकर विधि विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया जाएगा, ऐसा सपकाल ने कहा।
■ भाजपा सबकी यादें मिटाना चाहती है
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा विलासराव देशमुख पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने कहा कि विलासराव देशमुख का व्यक्तित्व और योगदान महान और निर्विवाद है। भाजपा, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, देवेंद्र फडणवीस और रविंद्र चव्हाण सत्ता के घमंड में डूबे हुए हैं। मोदी स्वयं को ईश्वर समझकर व्यवहार करते हैं और उनके चेले-चपाटे असभ्य और विकृत बयान देते रहते हैं—कांग्रेस इसकी कड़ी निंदा करती है।भाजपा की मानसिकता ऐसी है कि वह केवल विलासराव देशमुख की ही नहीं, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी, प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे के योगदान को भी मिटाना चाहती है। उन्हें केवल मोदी और शाह—ये दो ही नाम चाहिए। रेशीमबाग में हेडगेवार और गोलवलकर की तस्वीरें हटाकर मोदी–शाह की तस्वीरें लगाने की उनकी मंशा है।
■ देवाभाऊ नहीं, टक्काभाऊ
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सातारा जिले के एक गाँव में खेत में बड़ा ड्रग्स कारखाना पकड़ा गया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई कर 40 मजदूरों को हिरासत में लिया, लेकिन एकनाथ शिंदे के सांसद पुत्र श्रीकांत शिंदे के हस्तक्षेप के बाद उन्हें छोड़ने पर मजबूर किया गया। इस ड्रग्स मामले से यह स्पष्ट हो गया है कि ‘रहमान डकैत’ कौन है।इतना बड़ा ड्रग्स कारखाना मिलने के बावजूद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे को क्लीन चिट दे दी। सत्ताधारी पहले ठेकों से कमीशन खाते थे, अब ड्रग्स से भी पैसा कमाने लगे हैं। फडणवीस ‘देवाभाऊ’ नहीं बल्कि ‘टक्काभाऊ’ हैं, ऐसी तीखी आलोचना सपकाल ने की।
■ भाजपा के आशीष शेलार पर प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सावरकर जेल से बाहर आने के बाद क्या कर रहे थे? भारत छोड़ो आंदोलन का उन्होंने विरोध किया था। सावरकर ने गाय को ‘उपयोगी पशु’ कहा—यह भी ऐतिहासिक तथ्य है। छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज पर सावरकर के विचार क्या थे? संविधान का उनका विरोध, माफीनामे में व्यक्त उनके विचार—इन मुद्दों पर क्या शेलार बोलेंगे?
सावरकर 60 रुपये की पेंशन लेते थे—क्या यह शेलार को स्वीकार है? इस पर उन्हें स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कांग्रेस इस विषय पर आशीष शेलार से खुली बहस के लिए पूरी तरह तैयार है, ऐसा भी सपकाल ने कहा।
केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटील के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने कहा कि शिवाजी महाराज कौन थे, यह समझने के लिए गोविंद पानसरे की पुस्तक पढ़नी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का विरोध किन विचारधाराओं ने किया था—क्या पाटील उनसे सहमत हैं? यह उन्हें स्पष्ट करना चाहिए।
इस पत्रकार परिषद में नागपुर कांग्रेस अध्यक्ष विधायक विकास ठाकरे, पूर्व मंत्री अनिल अहमद, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल मुत्तेमवार, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।


