मुंबई वार्ता/सुरेश मिश्र/कवि

संविधान में समानता का फिर से रंग भरेंगे हम
वापस लेलो यूजीसी अब,वरना जंग करेंगे हम
धीरज,धर्म, सनातन वाले मातृभूमि के रखवाले।
जिनके कारण बची संस्कृति बदले नहीं धरम पाले।
भले कम रही हो आबादी,हमने लाई आजादी।
कम आबादी के कारण ही करवाइ रहे हो बरबादी
विविध रंग यदि नहीं चाहिए तो बेरंग करेंगे हम
वापस लेलो यूजीसी अब,वरना जंग करेंगे हम


थोड़े बहुत करेक्शन से ना काम चलेगा बाबूजी
मीठी बातों से ना अब कोहराम टलेगा बाबूजी
एससी एसटी लॉ कम था क्या अब ऐसी तैसी दे दी
यूसीसी पर वोट मांगकर हमको यूजीसी दे दी।
अगर उड़ोगे बहुत गगन में कटी पतंग करेंगे हम
वापस लेलो यूजीसी अब,वरना जंग करेंगे हम
कुछ जागे हैं अभी तलक कुछ सोए उन्हें जगाना है
दल के दलदल से ऊपर उठकर उनको समझाना है
दोयम दर्जे का जीवन बतलाओ क्यों स्वीकार करें
अपने बच्चों की खातिर मिलकर के अब प्रतिकार करें
बड़ी शांति से तुम लोगों की शांती भंग करेंगे हम
वापस लेलो यूजीसी अब,वरना जंग करेंगे हम
सबका साथ विकास सभी काकहां गया प्यारा नारा।
अगर बंटेंगे आप कटेंगे,और करें खुद बंटवारा।
बंटवारा करवाए तो बाबू तुम ही पछताओगे।
लिखकर रख लो उन्तिस में हीमिट्टी में मिल जाओगे।
बाभन,ठाकुर, बनिया,लाला अबकी दंग करेंगे हम
वापस लेलो यूजीसी अब,वरना जंग करेंगे हम
जिनके वोटो के बल पर हिंदू समाज में एक हुए
जिनकी बुद्धि और कौशल से जग में हाईटैक हुए
तुमको हम सब ने ही मिलकर बाबू नायक बना दिये
लेकिन दो प्रधान ने मिल खुद को खलनायक बना दिए
ऐसे कदम कदम छेड़ोगे, तो फिर हंग करेंगे हम
वापस लेलो यूजीसी अब,वरना जंग करेंगे हम
पाकिस्तान बने फिर भारत तुम सब मन में ठान लिए।
अल्पसंख्यकों को भी पिछड़ा, शोषित, वंचित मान लिए।
आतंकी यदि उन्हें कह दिए यूजीसी में फंसे सखा।
लव जिहाद की छूट दीजिए वरना तुम अपमान किए
पर्दे को बेपर्दा करके नंग-धड़ंग करेंगे हम
वापस लेलो यूजीसी अब,वरना जंग करेंगे हम।।


