■ बीएमसी का पायलट प्रोजेक्ट
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में उपेक्षित शहरी स्थानों को दोबारा उपयोग में लाने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक अनोखी पहल की योजना बनाई है। इसके तहत छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के टर्मिनल-1 के पास फ्लाईओवर के नीचे करीब 24,000 वर्गफुट क्षेत्र में ‘कम्युनिटी अर्बन फार्म’ विकसित किया जाएगा।


अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना पश्चिमी उपनगरों में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे कॉरिडोर में अपनी तरह की पहली पहल होगी, जहां स्थानीय लोग सब्जियां, फल और अन्य पौधे उगा सकेंगे। इस पायलट प्रोजेक्ट को अगले महीने शुरू किए जाने की संभावना है।परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए स्थानीय गीले कचरे से तैयार खाद का उपयोग किया जाएगा। फ्लाईओवर के नीचे के क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया जाएगा, ताकि अवैध पार्किंग और असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।


यह योजना माटुंगा में ‘गार्डन-अंडर-फ्लाईओवर’ और परेल की ‘वन ग्रीन माइल’ परियोजना की सफलता के बाद लाई जा रही है, लेकिन इसमें पहली बार खाद्य फसलों की सक्रिय खेती को मुख्य उद्देश्य बनाया गया है।योजना के तहत 6 फीट x 3 फीट के खेती के गड्ढे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें ‘अडॉप्शन बेसिस’ पर स्थानीय परिवारों को दिया जाएगा। ये परिवार अपने-अपने प्लॉट की देखरेख और फसल की कटाई करेंगे, जिससे ‘फार्म-टू-टेबल’ संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, बालकनी और टैरेस गार्डनिंग सिखाने के लिए एक डेमो क्षेत्र बनाया जाएगा। अतिरिक्त जैविक उपज की बिक्री के लिए एक छोटा हिस्सा निर्धारित होगा। साथ ही ‘प्लांट क्रेच’ भी विकसित की जाएगी, जहां लोग यात्रा के दौरान अपने घरेलू पौधों को देखभाल के लिए छोड़ सकेंगे।बीएमसी जमीन, पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध कराएगी, जबकि शेष काम स्थानीय संगठनों के सहयोग से किया जाएगा। फिलहाल 24 खेती के गड्ढे बनाए गए हैं, जिन्हें मांग और सहभागिता के अनुसार बढ़ाया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो इसी ‘एडिबल लैंडस्केप’ मॉडल को शहर के अन्य फ्लाईओवरों के नीचे भी लागू किया जाएगा।
एक वरिष्ठ नगर निगम अधिकारी ने कहा, “फ्लाईओवर के नीचे शहरी खेती में धूप की कमी और प्रदूषण जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन वर्टिकल गार्डनिंग तकनीक से स्थानीय माइक्रो-क्लाइमेट में सुधार संभव है। हमारा उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि कंक्रीट के जंगल के बीच एक कार्यात्मक हरित पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।”


