श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई में पार्किंग की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि महानगरपालिका द्वारा बनाए गए सार्वजनिक पार्किंग स्थल 50 प्रतिशत तक खाली पड़े हैं, इसके बावजूद ‘नो पार्किंग ज़ोन’ में वाहनों की अवैध पार्किंग से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।


शहर में बढ़ती वाहन संख्या के कारण ट्रैफिक जाम और धीमी रफ्तार जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। इस समस्या के समाधान के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें बहुस्तरीय रोबोटिक पार्किंग और सड़कों के किनारे शुल्क आधारित पार्किंग शामिल हैं। मुंबई में कुल 34 सार्वजनिक वाहनतल बनाए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 27,200 वाहनों की है, लेकिन इनका केवल आधा ही उपयोग हो पा रहा है।इसके बावजूद वीरेंद्र शिंदे ने 17 मार्च को होने वाली महापालिका बैठक में एक नया प्रस्ताव रखा है।


उन्होंने सुझाव दिया है कि मुंबई के खाली भूखंडों, उद्यानों और मैदानों में बहुस्तरीय पार्किंग प्रोजेक्ट विकसित किए जाएं, ताकि पार्किंग की समस्या का समाधान किया जा सके।हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर आम नागरिकों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि उद्यान और मैदानों पर पार्किंग बनाई गई, तो शहर के खुले स्थान धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि लोअर परेल स्थित ‘मुंबई टेक्सटाइल मिल’, ‘श्रीनिवास कॉटन मिल’ और ‘इंडिया बुल सेंटर’ जैसे स्थानों पर पार्किंग की पर्याप्त क्षमता होने के बावजूद वाहन कम खड़े होते हैं। वहीं, दादर पश्चिम के ‘एल्फिन्स्टन मिल’ क्षेत्र, भांडुप पश्चिम के ‘व्हिलेज नाहूर’, जेकब सर्कल, गोरेगांव के ‘पहाड़ी विलेज’ और अंधेरी पूर्व के ‘मरोळ विलेज’ में भी पार्किंग खाली होने के बावजूद उपयोग कम है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मौजूदा पार्किंग सुविधाओं का पूरा उपयोग नहीं हो रहा, तो क्या शहर के उद्यान और मैदानों को पार्किंग में बदलना सही समाधान होगा?


