श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

देवेंद्र फडणवीस के हस्तक्षेप और Shiv Sena (UBT) के कड़े विरोध के बाद बुधवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सुधार समिति ने चार विवादित प्रस्तावों को पुनर्विचार के लिए प्रशासन को वापस भेज दिया। इनमें मारोल स्थित सेवनहिल्स अस्पताल के निजीकरण से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है।


इस घटनाक्रम से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने आदित्य ठाकरे और शिवसेना (UBT) नेताओं की आपत्तियों के बाद हस्तक्षेप किया।


मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया था कि ये प्रस्ताव मुंबई के हितों के खिलाफ हैं और शहर में जमीन कब्जाने तथा निजीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं।


विवादित प्रस्तावों में सेवनहिल्स अस्पताल का निजीकरण, पांच बीएमसी अस्पतालों के ब्लड बैंकों का व्यवसायीकरण, बांद्रा रिक्लेमेशन में प्रदर्शनी केंद्र परियोजना और मालाबार हिल के ग्रीन ज़ोन में बदलाव का प्रस्ताव शामिल था।
सूत्रों के मुताबिक, फडणवीस ने बीएमसी में भाजपा नेताओं को निर्देश दिया कि इन प्रस्तावों को मंजूरी न देकर प्रशासन के पास पुनर्विचार के लिए भेजा जाए।
बुधवार को हुई सुधार समिति की बैठक में विपक्षी नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि अस्पतालों और ब्लड बैंकों को निजी कंपनियों को सौंपने से आम मुंबईकरों की सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कमजोर होगी और भविष्य में बीएमसी के अन्य बड़े अस्पतालों के निजीकरण का रास्ता खुल जाएगा।
सेवनहिल्स अस्पताल को लेकर लाए गए प्रस्ताव में 1500 बेड वाले बंद पड़े अस्पताल को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर फिर से शुरू करने की योजना थी। कॉर्पोरेट दिवाला प्रक्रिया के बाद बीएमसी ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी Capri Global Holdings Pvt Ltd और Reliance Industries की साझेदारी को अस्पताल संचालन के लिए चुना था। यह अस्पताल वर्ष 2018 से बंद पड़ा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान बीएमसी ने इस अस्पताल को मुंबई के सबसे बड़े कोविड उपचार केंद्रों में से एक के रूप में सफलतापूर्वक संचालित किया था। विपक्षी नेताओं ने इसी का हवाला देते हुए कहा कि बीएमसी स्वयं इस अस्पताल को चलाने में सक्षम है।
शिवसेना (UBT) की नगरसेवक और पूर्व महापौर विशाखा राऊत ने कहा कि यदि यह प्रस्ताव मंजूर हुआ तो मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था धीरे-धीरे निजी हाथों में चली जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या मुंबई को अंबानी और अडानी को सौंपने का फैसला हो चुका है? जनता को साफ-साफ बताया जाए।”
राऊत ने कहा कि कोविड काल में लाखों मरीजों का इलाज सेवनहिल्स अस्पताल में हुआ था, जिससे साबित होता है कि बीएमसी इतने बड़े अस्पताल का संचालन करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने यह भी पूछा कि लगभग 3500 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य बजट वाली बीएमसी आखिर मामूली आर्थिक लाभ के लिए अस्पताल क्यों सौंपना चाहती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि आज सेवनहिल्स अस्पताल का प्रस्ताव आया है, कल नायर, केईएम और सायन अस्पतालों के निजीकरण की बारी आ सकती है। उन्होंने बीएमसी अस्पतालों में भीड़भाड़ और बेड की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण जारी रहा तो भविष्य में एक बेड पर तीन मरीजों को रहना पड़ेगा।
कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने भी इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि मुंबई को मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरत है, न कि आवश्यक सेवाओं के और अधिक निजीकरण की।
विपक्ष ने बीएमसी संचालित ब्लड बैंकों से जुड़े प्रस्ताव का भी विरोध किया। नगरसेवकों का आरोप था कि अब तक बीएमसी के ब्लड बैंक मुफ्त सेवाएं देते रहे हैं, लेकिन नए प्रस्ताव के तहत गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को संचालन की अनुमति देकर 1100 रुपये तक शुल्क लेने का रास्ता खुल जाएगा। विशाखा राउत ने कहा, “मुंबई के खून का व्यवसायीकरण क्यों होने दिया जाए?”
तीखी बहस और विरोध के बाद सुधार समिति ने सेवनहिल्स अस्पताल और ब्लड बैंक से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी और उन्हें पुनर्विचार के लिए प्रशासन के पास वापस भेज दिया।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा, “मुझे खुशी है कि प्रस्तावों पर फिलहाल रोक लगी है, लेकिन इन्हें पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए। यदि भाजपा निजीकरण और रिक्रिएशनल ग्राउंड को रिहायशी उपयोग में बदलने वाले प्रस्ताव वापस लेती है तो मैं सार्वजनिक रूप से उनका धन्यवाद करूंगा।”
शिवसेना (UBT) के विधान परिषद सदस्य मिलिंद नार्वेकर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस से इस मुद्दे पर बातचीत की थी। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री को जब यह महसूस हुआ कि इन प्रस्तावों से बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है, तब उन्होंने इन्हें मंजूरी से रोक दिया।
वहीं, बीएमसी सुधार समिति की अध्यक्ष और शिवसेना नेता संध्या दोशी ने कहा कि सेवनहिल्स अस्पताल का प्रस्ताव न्यायाधिकरण के आदेश और विस्तृत अध्ययन के बाद तैयार किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि महायुति सरकार पिछली ठाकरे सरकार के 40 वर्षों की अव्यवस्था को सुधारने का काम कर रही है।


