अंधेरी सबवे को जलभराव से बचाने की तैयारी: बीएमसी बनाएगी 500 करोड़ रुपये की भूमिगत जल भंडारण टंकियां, आदित्य ठाकरे मॉडल पर काम।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता


मुंबई के अंधेरी इलाके में हर मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) तीन बड़ी भूमिगत जल भंडारण टंकियां बनाने की योजना पर विचार कर रही है। इन टंकियों की कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 41 हजार घनमीटर होगी और इस परियोजना पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इस प्रस्ताव को लेकर भाजपा विधायक अमित साटम ने हाल ही में बीएमसी अधिकारियों के साथ बैठक भी की है। खास बात यह है कि इसी तरह का मॉडल मुंबई के हिंदमाता इलाके में लागू किया गया था, जिसकी पहल आदित्य ठाकरे ने की थी। हिंदमाता में बाढ़ जैसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई भूमिगत जल भंडारण टंकियों को सफल प्रयोग माना जाता है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि जिन परियोजनाओं की कभी भाजपा आलोचना करती थी, अब अंधेरी की समस्या के समाधान के लिए उसी मॉडल को अपनाया जा रहा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि राजनीति में विरोध भले हो, लेकिन अंधेरी के लिए आदित्य ठाकरे का फॉर्मूला कारगर साबित हो सकता है।


आंकड़ों के अनुसार, अंधेरी सबवे वर्ष 2023 में 21 बार, 2024 में 25 बार और 2025 में 22 बार जलभराव की चपेट में आया था, जिससे यातायात बार-बार प्रभावित हुआ।

■ पहली ही बारिश में खुली बीएमसी की तैयारियों की पोल


बुधवार सुबह मुंबई में हुई प्री-मानसून बारिश के बाद अंधेरी सबवे में पानी भर जाने से कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। सुबह के व्यस्त समय में हुई इस घटना ने बीएमसी की मानसून पूर्व तैयारियों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।


पश्चिमी उपनगरों में हुई हल्की से मध्यम बारिश के दौरान कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ीं, जिससे अंधेरी सबवे में बड़ी मात्रा में पानी जमा हो गया। एहतियात के तौर पर सुबह 7:40 बजे सबवे को वाहनों के लिए बंद कर दिया गया।


स्थानीय लोगों के अनुसार, सबवे के आसपास निकाला गया गाद (सिल्ट) बड़ी मात्रा में किनारे पर ही रखा गया था। तेज बारिश के बाद यही गाद पानी के बहाव में बाधा बनी और देखते ही देखते सबवे जलमग्न हो गया। इससे नाला सफाई और मानसून पूर्व तैयारियों के दावों की भी पोल खुलती नजर आई।


अब बीएमसी की प्रस्तावित भूमिगत जल भंडारण परियोजना को अंधेरी की लंबे समय से चली आ रही जलभराव समस्या के स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

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