मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा विभिन्न परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर सलाहकार (कंसल्टेंट) कंपनियों की नियुक्ति किए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध जताया। सदस्यों ने मांग की कि सलाहकारों की नियुक्ति को लेकर प्रशासन पहले अपनी स्पष्ट नीति और मानदंड सार्वजनिक करे।


बैठक में सभागृह नेता गणेश खणकर, कांग्रेस के गुटनेता अशरफ आजमी, उद्धव सेना के यशोधर फणसे और श्रद्धा जाधव ने सलाहकार कंपनियों की नियुक्ति पर प्रशासन से जवाब मांगा। सदस्यों ने आरोप लगाया कि महापालिका के कई वरिष्ठ इंजीनियर सेवानिवृत्ति के बाद नामी सलाहकार कंपनियों में शामिल हो जाते हैं और अपने पुराने संपर्कों का उपयोग कर प्रशासन को यह विश्वास दिलाते हैं कि विभिन्न परियोजनाओं के लिए सलाहकार सेवाएं अनिवार्य हैं।


सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब बीएमसी के पास स्वयं अनुभवी और विशेषज्ञ इंजीनियर मौजूद हैं, तो फिर लगभग हर परियोजना के लिए बाहरी सलाहकारों पर करोड़ों रुपये क्यों खर्च किए जाते हैं। यह सवाल प्रकाश दरेकर, सईदा खान, जमीर कुरैशी और यामिनी जाधव ने भी उठाया।
इस पर प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि कोस्टल रोड, पंपिंग स्टेशन और भूमिगत मार्गों जैसी परियोजनाएं अत्यंत जटिल और तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होती हैं। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी और सटीकता से पूरा करने में कुछ प्रतिष्ठित सलाहकार कंपनियों की विशेषज्ञता उपयोगी साबित होती है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि हर सामान्य काम के लिए सलाहकार नियुक्त नहीं किए जाते और किसी एक कंपनी को लगातार काम नहीं दिया जाता, बल्कि विभिन्न कंपनियों को अवसर दिए जाते हैं। साथ ही, अब तक उनके कामकाज को लेकर कोई शिकायत भी प्राप्त नहीं हुई है।
चर्चा के बाद स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने प्रशासन को निर्देश दिया कि विभिन्न परियोजनाओं के लिए सलाहकार नियुक्त करने की नीति, उसके मानदंड और प्रक्रिया का विस्तृत विवरण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसके अलावा, पिछले 5 से 10 वर्षों में बीएमसी के कितने सेवानिवृत्त इंजीनियर सलाहकार कंपनियों में कार्यरत हुए हैं, इसकी जानकारी भी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है।


