मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में प्रथम वर्ष जूनियर कॉलेज (FYJC) यानी कक्षा 11वीं की केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के पहले चरण में कॉलेज आवंटित होने के बावजूद करीब दो लाख छात्रों ने प्रवेश की पुष्टि नहीं की है। राज्य स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1,99,277 छात्रों ने सीट मिलने के बावजूद दाखिला नहीं लिया।


इस वर्ष FYJC प्रवेश प्रक्रिया के लिए कुल 12.5 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 8.87 लाख छात्रों ने अपने कॉलेज विकल्प अंतिम रूप से जमा किए। पहली मेरिट सूची में 5,74,945 छात्रों को विभिन्न कॉलेजों में सीट आवंटित की गई, लेकिन केवल 3,75,668 छात्रों ने ही केंद्रीय प्रवेश प्रक्रिया (CAP) के माध्यम से अपना प्रवेश सुनिश्चित किया। परिणामस्वरूप 1,99,277 छात्र सीट मिलने के बावजूद प्रवेश से दूर रहे।
इस मामले में मुंबई विभाग सबसे आगे रहा। यहां 1,33,323 छात्रों को कॉलेज आवंटित हुए थे, लेकिन उनमें से 73,397 छात्रों ने प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसके बाद पुणे विभाग में 35,380 छात्रों ने सीट मिलने के बावजूद दाखिला नहीं लिया।
शिक्षा विभाग के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्र बेहतर कॉलेज मिलने की उम्मीद में अगले दौर का इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर खंडपीठ के आदेश के बाद लागू किए गए नए नियम के कारण बनी है।
पहले यदि किसी छात्र को उसकी पहली पसंद का कॉलेज मिल जाता था और वह प्रवेश लेने से इनकार करता था, तो उसे अगले प्रवेश दौर से बाहर कर दिया जाता था। लेकिन नए नियम के तहत छात्र अपनी पसंद का कॉलेज मिलने के बाद भी प्रवेश लेने से मना कर सकते हैं और फिर भी अगले ही दौर में भाग ले सकते हैं। इतना ही नहीं, वे दोबारा आवेदन करते समय अपने कॉलेज विकल्पों का क्रम भी बदल सकते हैं।
कॉलेज प्राचार्यों का कहना है कि कई छात्र बेहतर कॉलेज मिलने की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ छात्रों ने डिप्लोमा, आईटीआई, सीबीएसई, आईसीएसई स्कूलों या अन्य वैकल्पिक शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का चयन किया है। इसी वजह से पहले चरण के बाद बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं।
राज्यभर में पहले दौर के बाद 17.9 लाख सीटें अभी भी रिक्त हैं। इनमें मुंबई विभाग में सबसे अधिक 4.09 लाख सीटें खाली हैं। इसके बाद पुणे में 3.16 लाख और Chhatrapati Sambhaji Nagar विभाग में 2.70 लाख सीटें रिक्त पड़ी हैं।
शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि आगामी प्रवेश दौरों में बड़ी संख्या में छात्र अपने दाखिले की पुष्टि करेंगे और रिक्त सीटों की संख्या में कमी आएगी।


