श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत सेक्टर-1 में स्थित माहिम के राजश्री शाहू नगर परिसर के करीब 900 परिवारों को बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने सात दिनों के भीतर अपने घर खाली करने का नोटिस जारी किया है। नोटिस में धारावी पुनर्विकास प्राधिकरण (डीआरपी) और ठेकेदार कंपनी नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (एनएमडीपीएल) की ओर से ट्रांजिट कैंप और किराये के मकान का विकल्प उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, स्थानीय रहवासियों ने इस नोटिस का कड़ा विरोध करते हुए किसी भी हालत में घर खाली नहीं करने की घोषणा की है और उन्हें परियोजना से बाहर रखने की मांग की है।


डीआरपी और ठेकेदार कंपनी ने पुनर्विकास कार्य में तेजी लाने के लिए शाहू नगर की 45 इमारतों को खाली कराने का फैसला किया है। इसके तहत 900 फ्लैटधारकों को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस के अनुसार, सेक्टर-5 में म्हाडा द्वारा निर्मित इमारतों में 500 ट्रांजिट आवास उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि शेष परिवारों को किराया भत्ता दिया जाएगा। 275 वर्गफुट के फ्लैटधारकों को प्रतिमाह 22 हजार रुपये और 375 वर्गफुट के फ्लैटधारकों को 30 हजार रुपये किराये के रूप में देने का प्रस्ताव रखा गया है।
नोटिस मिलने के बाद रहवासियों में नाराजगी फैल गई है। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के सात दिन में घर खाली करने का आदेश देना अनुचित है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि उनकी कॉलोनी 60-65 वर्ष पुरानी है और इमारतें अभी अच्छी स्थिति में हैं, ऐसे में उन्हें धारावी पुनर्विकास में शामिल करने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि पहले झोपड़पट्टियों के पुनर्वसन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
वहीं, एक अन्य निवासी ने सवाल उठाया कि पुनर्वसन की प्रक्रिया, स्थान, मिलने वाले मकानों के आकार और पुनर्वसन की रूपरेखा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि जब तक पुनर्वसन का कोई औपचारिक समझौता नहीं होता, तब तक वे अपने घर खाली नहीं करेंगे।
रहवासियों की मुख्य मांग है कि उन्हें धारावी पुनर्विकास परियोजना से बाहर रखा जाए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पुनर्विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन यदि पुनर्विकास किया ही जाना है तो कॉलोनी के भीतर उपलब्ध खाली जमीन पर पुनर्वसित इमारतें बनाकर उनका पुनर्वास उसी स्थान पर किया जाए।


