मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए 44 मामलों को वापस लेने का निर्णय मंत्रिमंडल उपसमिति ने लिया है। उपसमिति ने इन मामलों को वापस लेने की सिफारिश राज्य सरकार को भेज दी है। इसकी जानकारी सांस्कृतिक कार्य मंत्री तथा समिति के अध्यक्ष एडवोकेट आशिष शेलार ने दी।


राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकास मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल उपसमिति का गठन किया गया है। बुधवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। इससे पहले हुई बैठक में 77 मामलों को वापस लेने की मंजूरी दी गई थी, जबकि इस बार 44 मामलों को वापस लेने की सिफारिश की गई।
समिति के समक्ष कुल 133 आवेदनों पर विचार किया गया, जिनमें से 44 आवेदकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया गया। बैठक में विधि एवं न्याय विभाग के प्रधान सचिव, अभियोजन संचालनालय के निदेशक, गृह विभाग के अधिकारी तथा राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे।
समिति ने स्पष्ट किया कि महिलाओं से संबंधित अपराध, गंभीर प्रकृति के मामले, व्यक्तिगत तथा दीवानी विवाद सरकार की नीति के तहत माफ नहीं किए जा सकते। इसलिए ऐसे मामलों को वापस लेने से साफ इनकार किया गया है।
इसके अलावा, वर्तमान और पूर्व विधायक तथा सांसदों से जुड़े मामलों में शासन के निर्णय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार अंतिम फैसला मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा और इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
133 आवेदनों में से 14 मामलों पर दोबारा विचार करने की सिफारिश की गई है। इन मामलों को पुलिस उपायुक्त की अध्यक्षता वाली क्षेत्रीय समिति के समक्ष रखा जाएगा। वहीं, 35 मामलों में कुछ मुकदमे पहले ही समाप्त हो चुके थे, जबकि 32 मामले समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते थे। वर्तमान में केवल 8 मामले लंबित हैं।
मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं, आंदोलनकारियों और वैचारिक आंदोलनों से जुड़े लोगों पर कई बार अनावश्यक रूप से मुकदमे दर्ज किए गए थे। ऐसे लोगों को बेवजह के मामलों से राहत दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि जिन मामलों को वापस लेने की सिफारिश की गई है, उनमें गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव, दही हांडी, विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों, गोवंश संरक्षण आंदोलनों और श्रमिक आंदोलनों से जुड़े मामले शामिल हैं।


