शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका, लोकसभा के छह सांसदों ने बनाया अलग गुट; 19 जून को शिंदे सेना में शामिल होने की चर्चा।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बड़ा राजनीतिक झटका लगने की खबर सामने आई है। पार्टी के छह लोकसभा सांसदों ने बुधवार को अलग गुट बनाकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंप दिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये सांसद 19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।


शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। इनमें से अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे को छोड़कर बाकी छह सांसदों के नए गुट में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार अलग गुट के गठन की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कर ली गई है।


इधर, सांसद संजय राउत, अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर उनसे अनुरोध किया कि शिवसेना (यूबीटी) से अलग होने वाले सांसदों द्वारा बनाए गए किसी भी गुट को मान्यता न दी जाए। हालांकि, शिवसेना के कुछ पदाधिकारियों का दावा है कि लोकसभा अध्यक्ष ने छह सांसदों के गुट को अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता दे दी है।


‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलों के बीच पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को गुरुवार सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित संसद भवन के कक्ष संख्या 128-ए में संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहने का व्हिप जारी किया है। यह व्हिप लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक और सांसद अनिल देसाई ने जारी किया है।


पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे भी नाराज सांसदों को मनाने के प्रयास में दिल्ली पहुंच सकते हैं और गुरुवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक में शामिल हो सकते हैं।


इससे पहले मंगलवार देर रात संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों द्वारा किसी अलग गुट या किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय के दावे पर विचार न किया जाए। उन्होंने कहा कि “असली शिवसेना” को लेकर पार्टी का दावा अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और इसी संदर्भ में यह पत्र लिखा गया है।


अरविंद सावंत ने यह कदम उन खबरों के बाद उठाया, जिनमें कहा गया था कि शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित कुछ सांसद लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता या किसी अन्य दल में विलय की मांग को लेकर अध्यक्ष से संपर्क कर सकते हैं।


इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। यदि छह सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए लोकसभा में बड़ा झटका माना जाएगा।

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